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Maa Laxmi

Maa Laxmi वह दिव्य शक्ति है जो सपनों को हकीकत में बदल देती है। वह प्रकृति है, संपूर्ण सृष्टि: आत्मनिर्भर, आत्मनिर्भर प्रकृति। वह माया है, रमणीय भ्रम, दिव्यता की स्वप्न जैसी अभिव्यक्ति जो जीवन को बोधगम्य बनाती है, इसलिए जीने योग्य है। वह शक्ति, ऊर्जा, असीम और भरपूर है। पहले अलक्ष्मी निकलती है, फिर समुद्र मंथन के दौरान Maa Laxmi प्रकट होती हैं। देवता अलक्ष्मी को हानिकारक व्यक्तियों के बीच रहने के लिए भेजते हैं, उन्हें दरिद्रता और दुःख देते हैं। वह अशुभता और दुःख के असुर के रूप में Maa Laxmi के विपरीत है जो शुभ और आनंद की देवी है। Maa Laxmi को श्री या थिरुमगल भी कहा जाता है क्योंकि वह छह शुभ और दैवीय गुणों, या गुणों से संपन्न है, और विष्णु की दिव्य शक्ति है। हिंदू धर्म में, वह आदिकालीन महासागर (समुद्र मंथन) के मंथन से पैदा हुई थी और उसने विष्णु को अपनी शाश्वत पत्नी के रूप में चुना था।

Top 10 Laxmi Maa Bhajan Lyrics | बेहतरीन लक्ष्मी माँ भजन लिरिक्स

  1. Laxmi Mata Aarti
  2. Om Jai Jagdish Hare
  3. Laxmi Mata Tere Bina Mann Na Mile
  4. Shree Laxmi Amritwani
  5. Shree Maa Laxmi Chalisa
  6. Maha Laxmi Mantra
  7. Laxmi Gayatri Mantra
  8. Laxmi Beej Mantra
  9. Jay Devi Jay Devi Jay Mahalakshmi
  10. Maa Vaibhav Laxmi Ki Aarti

1. Laxmi Mata Aarti लक्ष्‍मी माता आरती

मां लक्ष्‍मी की आरती
मां लक्ष्‍मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रूप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
।।ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
।।ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

2. Om Jai Jagdish Hare ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे -दुःख बिनसे मन का
स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे
सुख सम्पति घर आवे
कष्ट मिटे तन का
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा
आस करूं मैं जिसकी
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सब के स्वामी
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी
मैं सेवक तुम स्वामी
कृपा करो भर्ता
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति
स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय
किस विधि मिलूं दयामय
तुमको मैं कुमति
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता ठाकुर तुम मेरे
स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ
अपने शरण लगाओ
द्वार पड़ा तेरे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा
स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
सन्तन की सेवा
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तन मन धन सब कुछ है तेरा
स्वामी सब कुछ है तेरा
तेरा तुझको अर्पण
तेरा तुझको अर्पण
क्या लागे मेरा
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

3. Laxmi Mata Tere Bina Mann Na Mile लक्ष्मी माँ तेरे बिना मान ना मिलें

जय महालक्ष्मी, जय महालक्ष्मी,
जय महालक्ष्मी, जय महालक्ष्मी,
लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान ना मिलें,
मान ना मिले माँ, सम्मान ना मिले।

पैसे बिना कोई, काम नहीं होता,
काम नहीं होता कहीं, नाम ना होता,
धन के बिना तो, पहचान ना मिले,
मान ना मिले माँ, सम्मान ना मिले,
लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान ना मिलें,
मान ना मिले मां, सम्मान ना मिले।

तुम ही धनवर, छाँव करती हो,
निर्धन की, झोली भरती हो,
तेरी दया बिना, वरदान ना मिले,
मान ना मिले माँ, सम्मान ना मिले,
लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान ना मिलें,
मान ना मिले मां, सम्मान ना मिले।

पूजा करते, देव तुम्हारी,
ऊमा रमा, तुम पर बलिहारी,
नाम के बिना तो कहीं, दान ना मिले,
मान ना मिले माँ, सम्मान ना मिले,
लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान ना मिलें,
मान ना मिले मां, सम्मान ना मिले।

माँ सबके, भंडारे भरना,
तुम बिन क्या, जीना क्या मरना,
पैसे बिना दुनियाँ में, ज्ञान ना मिले,
मान ना मिले माँ, सम्मान ना मिले,
लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान ना मिलें,
मान ना मिले मां, सम्मान ना मिले।

जय महालक्ष्मी, जय महालक्ष्मी,
जय महालक्ष्मी, जय महालक्ष्मी,
लक्ष्मी माँ तेरे बिना, मान ना मिलें,
मान ना मिले माँ, सम्मान ना मिले।

4. Shree Laxmi Amritwani श्रीं लक्ष्मी अमृतवाणी

विश्वप्रिया कमलेश्वरी, लक्ष्मी दया निधान,
तिमिर हरो अज्ञान का, ज्ञान का दो वरदान।
आठो सिद्धिया द्वार तेरे, खड़ी है माँ कर जोड़,
निज भक्तन की नाँव को, तट की ओर तू मोड़।
निर्धन हम लाचार बड़े, तू है धन का कोष,
सुख की वर्षा करके माँ, हर लो दुःख का दोष।
(जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता,
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। )

जीवन चंदा को मैया, ग्रहण लगा घनघोर,
डगमग डोले पग हमरे, हम मानव कमज़ोर,
महासुखदाई नाम तेरा, कर कष्टों का अंत
वनस्थली जैसी ये काया, दे दो इसे बसंत
दिव्य रूप नारायणी, पारस है तेरा धाम,
तेरे सुमिरन से होते, संतन के सिद्ध काज।
(जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता,
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। )

स्वर्ण सी तेरी कांति, भय का करती नाश,
तेरी करुणा से टूटे, हर जंजाल का पाश,
मैया शोक विनाशिनी, ऐसा करो उपकार,
जीवन नौका हो जाए, भवसिंधु से पार,
शेष की सैया बैठ के, सकल विश्व को देख,
तेरी दृष्टि में मैया, हर मस्तक की रेख।
(जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता,
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। )

माता लक्ष्मी जी का यह भजन भी अवश्य सुनें :
लक्ष्मी माँ तेरे बिना मान ना मिलें भजन
सिंधु सुता भागेश्वरी, दीजो भाग्य जगाय,
तज के जग को हम तेरी, शरण गए हैं आय,
तू बैकुंठ निवासिनी, हम नरकों के जीव
प्राणहीन ये देह कहे, कर दो हमें सजीव,
कमला वैभव लक्ष्मी, सुख सिद्धि तेरे पास,
सागर तट पे हम प्यासे, मैया बुझा दो प्यास।
(जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता,
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। )

धन धान्य से घर हमरे, सदा रहे भरपूर,
हर्ष के फूल खिलाय के, कांटे कर दो दूर,
तेरी अलौकिक माया से, भागे दुःख संताप,
रोम रोम माँ करे तेरा, मंगलकारी जाप,
हर की है अर्धांगिनी, कृपा की दृष्टि कर,
अन्न धन संपत्ति से माँ भरा रहे ये घर,
(जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता,
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। )

सागर मंथन से प्रकटी, ज्योति अपरम्पार,
मन से चिंतन हम करे, सबकी चिंता हार,
मन से चिंतन हम करे, सबकी चिंता हार,
मन से चिंतन हम करे, सबकी चिंता हार,
(जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता,
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। )

5. Shree Maa Laxmi Chalisa श्रीं लक्ष्मी चालीसा

॥ दोहा ॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा,
करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि,
परुवहु मेरी आस॥

॥ सोरठा ॥

यही मोर अरदास,
हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास,
जय जननि जगदम्बिका।

॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।
ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी।
सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

जय जय जगत जननि जगदम्बा।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी।
विनती यही हमारी खासी॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी।
दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।
कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।
सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।
जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता।
संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।
रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई।
मन इच्छित वाञ्छित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई।
पूजहिं विविध भांति मनलाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई।
जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई।
मन इच्छित पावै फल सोई॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।
त्रिविध ताप भव बन्धन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

ताकौ कोई न रोग सतावै।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु सम्पति हीना।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै।
शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा।
ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा।
होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी।
सब में व्यापित हो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी।
दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में।
सब जानत हो अपने मन में॥
रुप चतुर्भुज करके धारण।
कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।
ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥

॥ दोहा ॥

त्राहि त्राहि दुःख हारिणी,
हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी,
करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित,
विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर,
करहु दया की कोर॥

6. Maha Laxmi Mantra महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

7. Laxmi Gayatri Mantra लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

8. Laxmi Beej Mantra लक्ष्मी बीज मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥

9. Jay Devi Jay Devi Jay Mahalakshmi जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी

श्री महालक्ष्मीची आरती
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।
पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।
कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।
सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥

जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।
झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।
माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।
शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥

जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।
सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।
गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।
प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी॥

जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।
मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।
वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।
हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी॥

जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।
लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।
पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।
मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी॥

जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी…॥

10. Maa Vaibhav Laxmi Ki Aarti माँ वैभव लक्ष्मी जी की आरती

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,
मैया वैभव लक्ष्मी माता,
भक्तों के हितकारिनी,
भक्तों के हितकारिनी,
सुख वैभव दाता,
ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

लक्ष्मी माँ का नाम जो लेता,
सुख सम्पति पाता,
मैया सुख सम्पति पाता,
दुःख दरिद्र मिटता,
दुःख दरिद्र मिटता,
बांछित फल पाता ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,
मैया वैभव लक्ष्मी माता,
भक्तों के हितकारिनी,
भक्तों के हितकारिनी,
सुख वैभव दाता,
ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

लक्ष्मी माता तू जग माता,
जग पालक रानी,
मैया जग पालक रानी,
हाथ जोड़ गुण गाते,
हाथ जोड़ गुण गाते,
जग के सब प्राणी ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,
मैया वैभव लक्ष्मी माता,
भक्तों के हितकारिनी,
भक्तों के हितकारिनी,
सुख वैभव दाता,
ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

हे माँ तेरी शरण में जो आता,
तेरी भक्ति पाता,
मैया तेरी भक्ति पाता,
माँ तेरी ममता पा के,
माँ तेरी ममता पा के,
अंत स्वर्ग जाता ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,
मैया वैभव लक्ष्मी माता,
भक्तों के हितकारिनी,
भक्तों के हितकारिनी,
सुख वैभव दाता,
ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

ॐ वैभव लक्ष्मी माता,
मैया वैभव लक्ष्मी माता,
भक्तों के हितकारिनी,
भक्तों के हितकारिनी,
सुख वैभव दाता,
ॐ वैभव लक्ष्मी माता,
ॐ वैभव लक्ष्मी माता ।

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