यहाँ आपको Top 10 Bhajans for Ringtones Lyrics बेहतरीन रिंगटोन के लिए भजन लिरिक्स मिलेंग। यह Top Top 10 Bhajans for Ringtones Lyrics रिंगटोन के लिए भजन लिरिक्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय तथा सबसे ज्यादा सुने जाने वाले भजन है। हम उम्मीद करते हैं आपको यह Top Top 10 Bhajans for Ringtones Lyrics रिंगटोन के लिए भजन लिरिक्स पसंद आएंगे।

  1. Jai Ganesh Deva
  2. Jay Hanuman Gyan gun Sagar
  3. Shiv Tandav
  4. Karpur Gauram
  5. Shiv Storm
  6. Shiv Narayan
  7. Aghori
  8. Rakshedhali
  9. Dwarkadhish
  10. Jai mata di

1. Jai Ganesh Deva जय गणेश देवा

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

2. Jay Hanuman Gyan gun Sagar जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवनकुमार।
बल बुधि विधा देहु मोहि हरहु कलेस विकार॥

|| चौपाई ||

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥ ३ ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ५ ॥
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥ ६ ॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥ ७ ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥ ८ ॥

सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचन्द्र के काज सँवारे॥ १० ॥

लाय सँजीवनि लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ ११ ॥
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ १२ ॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ १३ ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥

जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते।
कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥ १५ ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ १६ ॥

तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ १८ ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ १९ ॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ २० ॥

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ २१ ॥
सब सुख लहै तुम्हारी शरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥ २२ ॥

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥ २३ ॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोहि अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥ २९ ॥
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥ ३० ॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता॥ ३१ ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥ ३२ ॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥ ३३ ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ ३४ ॥

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ ३५ ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥

जय जय जय हनुमान गुसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ ३७ ॥
जो शत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥

जो यह पढे हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ ३९ ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ४० ॥

|| दोहा ||

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥

3. Shiv Tandav शिव तांडव

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

4. Karpur Gauram कर्पूरगौरं

कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे
भबं भवानीसहितं नमामि ।।

मंगलम भगवान् विष्णु
मंगलम गरुड़ध्वजः |
मंगलम पुन्डरी काक्षो
मंगलायतनो हरि ||

सर्व मंगल मांग्लयै शिवे सर्वार्थ साधिके |
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||

5. Shiv Storm

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

6. Shreeman Narayan श्रीमन नारायण

श्री मन नारायण नारायण हरि हरि
तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरि हरि ।
भज मन नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि ।।

हरी ॐ नमो नारायणा, ॐ नमो नारायणा
हरी ॐ नमो नारायणा

लक्ष्मी नारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि ।
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।।

सत्य नारायण नारायण हरि हरि
जपो नारायण नारायण हरि हरि।
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।।

सुर्य नारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि।
भज मन नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि ।।

विष्णु नारायण नारायण हरि हरि
जपो नारायण नारायण हरि हरि।
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि।।

बदरीनारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि ।
भजो मन नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि ।।

ब्रह्म नारायण नारायण हरि हरि
जपो नारायण नारायण हरि हरि ।
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि ।।

चन्द्र नारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि ।
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि ।।

भक्तो के प्यारे हरि हरि
आधार हमारे हरि हरि ।
तन मन में बसे हो हरि हरि
कण कण में बसे हो हरि हरि ।।

तेरी छवि है सुन्दर न्यारी न्यारी हरि हरि
तेरी मूरत मंगल कारी हरि हरि हरि
शरण में अपनी लेलो हरि हरि हरि

पृथ्वी नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
हम आए शरण तिहारी हरि हरि

शिव नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि ।
तेरी मूरत मंगल कारी हरि हरि हरि
शरण में अपनी लेलो हरि हरि हरि ।।

7. Bhola Aghori Shankar भोला अघोरी शंकर

भोला अघोरी शंकर नाचे मस्ती में भंग पी कर नाचे,
भोला नाचे भोली नाचे भोले के हम झोली नाचे,
हो के सभी बेफिक्र नाचे मस्ती में भंग पी कर नाचे ||

आ गई कवाड़ीयो की टोली झूम रहे सब भोला भोली,
कोई आगे कोई पीछे मस्ती में सब सुलफा खिचे,
मस्ती में सब खो कर नाचे मस्ती में भंग पी कर नाचे ||

भोले की भगती में टूल है सारे झी मस्ती में फुल है,
कोई इनसे बच नही सकता आगे जोड़ लो इनका रस्ता,
बोल के बम बम हर नाचे
मस्ती में भंग पी कर नाचे ||

सब ने चडाया भांग का गोला साथ में इनके बम बम गोला,
साथ में इनके शंकर बोला बम बम के जयकारे गूंजे,
शर्मा दीपक संग में झूमे सब से यही कह कर नाचे,
मस्ती में भंग पी कर नाचे ||

8. Radhe Radhe राधे राधे

राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता ।

मन तो है चंचल,
तन तो है पिंजरा,
पिंजरे में है तेरा वास,
मन तो है चंचल,
तन तो है पिंजरा,
पिंजरे में है तेरा वास,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता ।

राधा है अगर मिश्री,
तो मिठास है बिहारी,
राधा है अगर मोहिनी,
तो मोहन है बिहारी,
राधा है अगर गंगा,
तो धार है बिहारी,
राधा है अगर भोली,
तो चंचल है बिहारी,
एक दूजे के रंग में रहे है,
एक है चंदा एक चकोरी,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता ।

बरसाने की लाड़ली राधा,
हर लेती है सब दुःख बाधा,
राधा के संग झूमें कान्हा,
कान्हा के संग झूमि सखियाँ,
ये अंबर बोले राधा,
बृज मंडल बोले राधा,
कान्हा की मुरली बोले राधा,
राधा राधा बस राधा,
इश्क तृष्णा ओ मेरे कृष्णा,
मीरा रोए दिन रात,
विष क्या होता शम्भू से पूछो,
मीरा से पूछो ना ये बात,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता ।

गोपाल गोविंद बोल मना,
हरी हरी बोल मना,
कृष्णा राधे कृष्णा बोल मना,
राधे श्याम बोल मना,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता ।

राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता,
राधे राधे राधे बोल मना,
तन का क्या पता ।

9. Ram Siya Ram राम सिया राम

कौशल्या, दशरथ के नंदन,
राम ललाट पे शोभित चन्दन,
रघुपति की जय बोले लक्ष्मण,
राम सिया का हो अभिनन्दन ।

अंजनी पुत्र पड़े हैं चरण में,
राम सिया जपते तन मन में ।

मंगल भवन अमंगल हारी,
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।

राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम

मेरे तन मन धड़कन में,
सिया राम राम है,
मन मंदिर के दर्पण में,
सिया राम राम है ।

तू ही सिया का राम,
राधा का तू ही श्याम,
जन्मो जनम का ही ये साथ है ।

मीरा का तू भजन,
भजते हरी पवन,
तुलसी में भी लिखी ये बात है ।

मंगल भवन अमंगल हारी,
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।

राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम

मंगल भवन अमंगल हारी,
मंगल भवन अमंगल हारी,
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।

राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम

10. Tune Mujhe Bulaya Sherawaliye तुने मुझे बुलाया शेरावालिये

साँची ज्योतो वाली माता,
तेरी जय जय कार
जय जय कार जय जय कार

तुने मुझे बुलाया शेरावालिये,
मैं आया मैं आया शेरावालिये
ज्योता वालिये, पहाड़ा वालिये, मेहरा वालिये
तुने मुझे बुलाया शेरावालिये,

मैं आया मैं आया शेरावालिये

सारा जग है इक बंजारा,
सब की मंजिल तेरा द्वारा
ऊँचे परबत लम्बा रस्ता,
पर मैं रह ना पाया शेरा वालिये

मैं आया मैं आया शेरावालिये
तुने मुझे बुलाया शेरावालिये,

सूने मन में जल गयी बाती,
तेरे पथ में मिल गए साथी।
मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू,
बिन मांगे सब पाया, शेरा वालिये

मैं आया मैं आया शेरावालिये
तुने मुझे बुलाया शेरावालिये,

कौन है राजा, कौन भिखारी,
एक बराबर तेरे सारे पुजारी
तुने सब को दर्शन देके,
अपने गले लगाया, शेरा वालिये

तुने मुझे बुलाया शेरावालिये,

मैं आया मैं आया शेरावालिये

हो प्रेम से बोलो जय माता दी
सारे बोलो जय माता दी
मिलकर बोलो जय माता दी
आते बोलो जय माता दी
जाते बोलो जय माता दी

वो कष्ट निवारे जय माता दी
देवी माँ भोली जय माता दी
तू भर दे झोली जय माता दी
माँ दे दे दर्शन जय माता दी
जय माता दी जय माता दी
जय माता दी …..

शेरावालियाये की जय ….
पहाड़ावालिये की जय ……
अम्बेरानी की जय …..

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