यहाँ आपको Top 25 bhajan Collection Lyrics बेहतरीन भजन संग्रह लिरिक्स मिलेंग। यह Top 25 bhajan Collection Lyrics बेहतरीन भजन संग्रह लिरिक्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय तथा सबसे ज्यादा सुने जाने वाले भजन है। हम उम्मीद करते हैं आपको यह Top 25 bhajan Collection Lyrics बेहतरीन भजन संग्रह लिरिक्स पसंद आएंगे।

  1. Shree Hanuman Chalisa
  2. Shree Hanuman Amritwani
  3. Mai Baalak Tu Mata
  4. Hey Shambhu Baba
  5. O Aaye Tere Bhawan
  6. Shiv Amritwani
  7. Mann Mera Mandir
  8. Durga Amritwani
  9. Maha Mrityunjay Mantra
  10. Gayatri Mantra
  11. Jagat Ke Rang Kya Dekhu
  12. Mithe Ras Se Bharyo Radha Rani Lage
  13. Ek Nazar Kirpa Ki Kardo Ladali Shri Radhe
  14. Kanha O Kanha Chhed De Muraliya
  15. Govind Bolo Hari Gopal Bolo
  16. Ram Ji Ki Nikli Sawari
  17. Vrindavan Ka Krishan Kanhaiya
  18. Hey Ram Hey Ram
  19. Prabhu Ji Tum Chandan Hum Paani
  20. Om Jai Jagdish Hare
  21. Yashomati Maiya Se Bole Nandlala
  22. Shankar Mere Kab Honge Darshan Tere
  23. Duniya Mein Tera Bada Naam
  24. Ram Chandra Keh Gaye Siya Se
  25. Rom Rom Mein Basne Wale Ram

1. Shree Hanuman Chalisa श्री हनुमान चालीसा

।। दोहा ।।

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ।।

।। चौपाई ।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ।१।

राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।२।

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी ।३।

कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा ।४।

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे ।५।

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन ।६।

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर ।७।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया ।८।

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा ।९।

भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे ।१०।

लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए ।११।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई ।१२।

सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ।१३।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा ।१४।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ।१५।

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा ।१६।

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना ।१७।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ।१८।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही ।१९।

दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।२०।

राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे ।२१।

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना ।२२।

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै ।२३।

भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै ।२४।

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा ।२५।

संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ।२६।

सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा ।२७।

और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै ।२८।

चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा ।२९।

साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे ।३०।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता ।३१।

राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा ।३२।

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै ।३३।

अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ।३४।

और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई ।३५।

संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।३६।

जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई ।३७।

जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई ।३८।

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा ।३९।

तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा ।४०।

।। दोहा ।।

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।

2. Shree Hanuman Amritwani श्री हनुमान अमृतवाणी

भक्त राज हनुमान का,
सुमिरण है सुख कार,
जीवन नौका को करे,
भव सिन्धु से पार ।

संकट मोचन नाथ को,
सौंप दे अपनी डोर,
छटेगी दुखों को पल में,
छायी घटा घनघोर ।

जब कष्टों के दैत्य को,
लगेगा बजरंग बाण,
होगी तेरी हर मुश्किल,
धडियों में आसान ।

महा दयालु हनुमत का,
जप ले मनवा नाम,
काया निर्मल हो जाएगी,
बनेंगे बिगड़े काम ।

जय जय जय हनुमान,
जय हो दया निधान ।

कपि की करुणा से मन की,
हर दुविधा हर जाए,
दया की दृष्टि होते ही,
पत्थर भी तर जाय ।

कल्प तरो हनुमंत से,
भक्ति का फल मांग,
एक हो भीतर बहार से,
छोड़ रचा निस्वांग ।

इसकी कैसे मनोदसा,
जानत है बजरंग,
क्यों तू गिरगिट की तरह,
रोज बदलता रंग ।

कांटे बोकर हर जगह,
ढूँढ रहा तू फूल,
घट – घट की वो जानता,
क्यों गया रे तू भूल ।

जय जय जय हनुमान,
जय हो दया निधान ।

करुणा मयी कपिराज को,
धोखा तू मत दे,
हर छलियों को वो छले,
जब वो खेल करे ।

हम हैं खिलौने माटी के,
हमरी क्या औकात,
तोड़े रखे ये उसकी,
मर्जी की है बात ।

साधक बन हनुमंत ने,
जिस विधि पायो राम,
बहुत नहीं तो थोड़ा ही,
तू कर वैसा काम ।

बैठ किनारे सागर के,
किमुती अनेकी आस,
डूबन से मन डरता रे,
कच्चा तेरा विश्वास ।

जय जय जय हनुमान,
जय हो दया निधान ।

सुख सागर महावीर से,
सुख की आंच न कर,
दुःख भी उसी का खेल है,
दुखों से ना डर ।

बिना जले ना भट्टी में,
सोना कुंदन होय,
आंच जरा सी लगते ही,
क्यों तू मानव रोय ।

भक्ति कर हनुमान की,
यही है मारग ठीक,
मंजिल पानी है अगर,
संकट सहना सिख ।

बुरे करम तो लाख हैं,
भला कियो ना एक,
फिर कहता हनुमंत से,
मुझे दया से देख ।

जय जय जय हनुमान,
जय हो दया निधान,
जय जय जय हनुमान,
जय हो दया निधान ।

3. Mai Baalak Tu Mata मैं बालक तू माता

मैं बालक तू माता शेरावालिए,
है अटूट ये नाता शेरावालिए,
शेरा वालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,
मेहरा वालिए माँ, ज्योतां वालिए माँ ।
मैं बालक तू माता शेरावालिए,
है अटूट ये नाता शेरावालिए ।

तेरी ममता मिली है मुझको,
तेरा प्यार मिला है,
तेरे आँचल की छाया में,
मन का फूल खिला है ।
तुने बुद्धि, तुने साहस,
तुने बुद्धि, तुने साहस,
तुने ज्ञान दिया,
मस्तक ऊँचा करके,
जीने के वरदान दिया माँ ।
तू है भाग्य विधाता शेरावालिए,
मैं बालक तू माता शेरावालिए,
शेरा वालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,
मेहरा वालिए माँ, ज्योतां वालिए माँ ।
मैं बालक तू माता शेरावालिए,
है अटूट ये नाता शेरावालिए ।

जब से दो नैनो में तेरी,
पावन ज्योत समायी,
मंदिर मंदिर तेरी मूरत,
देने लगी दिखाई ।
ऊँचे पर्वत पर मैंने भी,
ऊँचे पर्वत पर मैंने भी,
डाल दिया है डेरा,
निशदिन करे जो तेरी सेवा,
मैं वो दास हूँ तेरा ।
रहूँ तेरे गुण गाता शेरावालिए,
मैं बालक तू माता शेरावालिए,
शेरा वालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,
मेहरा वालिए माँ, ज्योतां वालिए माँ ।

मैं बालक तू माता शेरावालिए,
है अटूट ये नाता शेरावालिए,
शेरा वालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,
मेहरा वालिए माँ, ज्योतां वालिए माँ ।
मैं बालक तू माता शेरावालिए,
है अटूट ये नाता शेरावालिए ।

4. Hey Shambhu Baba हे शम्भू बाबा

शिव नाम से है जगत में उजाला
हरी भक्तो के है, मन में शिवाला

हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ
तीनो लोक में तू ही तू
श्रद्धा सुमन मेरा मन बेलपत्री
जीवन भी अर्पण कर दूँ

हे शंभू बाबा मेरे भोलेनाथ
तीनो लोक में तू ही तू श्रद्धा सुमन मेरा मन बेलपत्री
जीवन भी अर्पण कर दूँ हे शम्भू बाबा मेरे भोलेनाथ
तीनो लोक में तू ही तू जग का स्वामी है तू
अंतरयामी है तू मेरे जीवन की अमित कहानी है तू

तेरी शक्ति अपार, तेरा पावन है द्वार
तेरी पूजा ही मेरा जीवन आधार
धुल तेरे चरणों की ले कर जीवन को साकार किया
हे शंभू बाबा मेरे भोलेनाथ तीनो लोक में तू ही तू

मन में है कामना कुछ मैं और जानूना
ज़िन्दगी भर करू तेरी आराधना
सुख की पहचान दे तू मुझे ज्ञान दे
प्रेम सब से करूँ ऐसा वरदान दे
तुने दिया बल निर्बल को अज्ञानी को ज्ञान दिया
हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ तीनो लोक में तू ही तू
श्रद्धा सुमन मेरा मन बेलपत्री जीवन भी अर्पण कर दूँ
हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ तीनो लोक में तू ही तू

5. Aaye Tere Bhawan आये तेरे भवन

आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण,
रहे तुझ में मगन, थाम के यह चरण ।
तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

उत्सव मनाये, नाचे गाये,
चलो मैया के दर जाएँ ।
चारो दिशाए चार खम्बे बनी हैं,
मंडप में आत्मा की चारद तानी है ।
सूरज भी किरणों की माला ले आया,
कुदरत ने धरती का आँगन सजाया ।
करके तेरे दर्शन, झूमे धरती पवन,
सन नन नन गाये पवन, सभी तुझ में मगन,
तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

फूलों ने रंगों से रंगोली सजाई,
सारी धरती यह महकायी ।
चरणों में बहती है गंगा की धरा,
आरती का दीपक लगे हर एक सितारा ।
पुरवैया देखो चवर कैसे झुलाए,
ऋतुएँ भी माता का झुला झुलायें ।
पा के भक्ति का धन, हुआ पावन यह मन,
कर के तेरा सुमिरन, खुले अंतर नयन,
तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

6. Shiv Amritwani शिव अमृतवाणी

।। भाग १ ।।

कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम
हितकारक संजीवनी, शिव चिंतन अविराम
पतिक पावन जैसे मधुर, शिव रसन के घोलक
भक्ति के हंसा ही चुगे, मोती ये अनमोल
जैसे तनिक सुहागा, सोने को चमकाए
शिव सुमिरन से आत्मा, अध्भुत निखरी जाये
जैसे चन्दन वृक्ष को, दस्ते नहीं है नाग
शिव भक्तो के चोले को, कभी लगे न दाग

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय !

दया निधि भूतेश्वर, शिव है चतुर सुजान
कण कण भीतर है, बसे नील कंठ भगवान
चंद्र चूड के त्रिनेत्र, उमा पति विश्वास
शरणागत के ये सदा, काटे सकल क्लेश
शिव द्वारे प्रपंच का, चल नहीं सकता खेल
आग और पानी का, जैसे होता नहीं है मेल
भय भंजन नटराज है, डमरू वाले नाथ
शिव का वंधन जो करे, शिव है उनके साथ

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय !

लाखो अश्वमेध हो, सोउ गंगा स्नान
इनसे उत्तम है कही, शिव चरणों का ध्यान
अलख निरंजन नाद से, उपजे आत्मा ज्ञान
भटके को रास्ता मिले, मुश्किल हो आसान
अमर गुणों की खान है, चित शुद्धि शिव जाप
सत्संगती में बैठ कर, करलो पश्चाताप
लिंगेश्वर के मनन से, सिद्ध हो जाते काज
नमः शिवाय रटता जा, शिव रखेंगे लाज

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय !

शिव चरणों को छूने से, तन मन पवन होये
शिव के रूप अनूप की, समता करे न कोई
महा बलि महा देव है, महा प्रभु महा काल
असुराणखण्डन भक्त की, पीड़ा हरे तत्काल
शर्वा व्यापी शिव भोला, धर्म रूप सुख काज
अमर अनंता भगवंता, जग के पालन हार
शिव करता संसार के, शिव सृष्टि के मूल
रोम रोम शिव रमने दो, शिव न जईओ भूल

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय !

।। भाग २ & ३ ।।

शिव अमृत की पावन धारा,
धो देती हर कष्ट हमारा
शिव का काज सदा सुखदायी,
शिव के बिन है कौन सहायी
शिव की निसदिन की जो भक्ति,
देंगे शिव हर भय से मुक्ति
माथे धरो शिव नाम की धुली,
टूट जायेगी यम कि सूली
शिव का साधक दुःख ना माने,
शिव को हरपल सम्मुख जाने
सौंप दी जिसने शिव को डोर,
लूटे ना उसको पांचो चोर
शिव सागर में जो जन डूबे,
संकट से वो हंस के जूझे
शिव है जिनके संगी साथी,
उन्हें ना विपदा कभी सताती
शिव भक्तन का पकडे हाथ,
शिव संतन के सदा ही साथ
शिव ने है बृह्माण्ड रचाया,
तीनो लोक है शिव कि माया
जिन पे शिव की करुणा होती,
वो कंकड़ बन जाते मोती
शिव संग तान प्रेम की जोड़ो,
शिव के चरण कभी ना छोडो
शिव में मनवा मन को रंग ले,
शिव मस्तक की रेखा बदले
शिव हर जन की नस-नस जाने,
बुरा भला वो सब पहचाने
अजर अमर है शिव अविनाशी,
शिव पूजन से कटे चौरासी
यहाँ वहाँ शिव सर्व व्यापक,
शिव की दया के बनिये याचक
शिव को दीजो सच्ची निष्ठां,
होने न देना शिव को रुष्टा
शिव है श्रद्धा के ही भूखे,
भोग लगे चाहे रूखे-सूखे
भावना शिव को बस में करती,
प्रीत से ही तो प्रीत है बढ़ती
शिव कहते है मन से जागो,
प्रेम करो अभिमान त्यागो

।। दोहा ।।
दुनिया का मोह त्याग के शिव में रहिये लीन ।
सुख-दुःख हानि-लाभ तो शिव के ही है अधीन ।।

भस्म रमैया पार्वती वल्ल्भ,
शिव फलदायक शिव है दुर्लभ
महा कौतुकी है शिव शंकर,
त्रिशूल धारी शिव अभयंकर
शिव की रचना धरती अम्बर,
देवो के स्वामी शिव है दिगंबर
काल दहन शिव रूण्डन पोषित,
होने न देते धर्म को दूषित
दुर्गापति शिव गिरिजानाथ,
देते है सुखों की प्रभात
सृष्टिकर्ता त्रिपुरधारी,
शिव की महिमा कही ना जाती
दिव्या तेज के रवि है शंकर,
पूजे हम सब तभी है शंकर
शिव सम और कोई और न दानी,
शिव की भक्ति है कल्याणी
कहते मुनिवर गुणी स्थानी,
शिव की बातें शिव ही जाने
भक्तों का है शिव प्रिय हलाहल,
नेकी का रस बाटँते हर पल
सबके मनोरथ सिद्ध कर देते,
सबकी चिंता शिव हर लेते
बम भोला अवधूत सवरूपा,
शिव दर्शन है अति अनुपा
अनुकम्पा का शिव है झरना,
हरने वाले सबकी तृष्णा
भूतो के अधिपति है शंकर,
निर्मल मन शुभ मति है शंकर
काम के शत्रु विष के नाशक,
शिव महायोगी भय विनाशक
रूद्र रूप शिव महा तेजस्वी,
शिव के जैसा कौन तपस्वी
हिमगिरी पर्वत शिव का डेरा,
शिव सम्मुख न टिके अंधेरा
लाखों सूरज की शिव ज्योति,
शस्त्रों में शिव उपमान होशी
शिव है जग के सृजन हारे,
बंधु सखा शिव इष्ट हमारे
गौ ब्राह्मण के वे हितकारी,
कोई न शिव सा पर उपकारी

।। दोहा ।।
शिव करुणा के स्रोत है शिव से करियो प्रीत ।
शिव ही परम पुनीत है शिव साचे मन मीत ।।

शिव सर्पो के भूषणधारी,
पाप के भक्षण शिव त्रिपुरारी
जटाजूट शिव चंद्रशेखर,
विश्व के रक्षक कला कलेश्वर
शिव की वंदना करने वाला,
धन वैभव पा जाये निराला
कष्ट निवारक शिव की पूजा,
शिव सा दयालु और ना दूजा
पंचमुखी जब रूप दिखावे,
दानव दल में भय छा जावे
डम-डम डमरू जब भी बोले,
चोर निशाचर का मन डोले
घोट घाट जब भंग चढ़ावे,
क्या है लीला समझ ना आवे
शिव है योगी शिव सन्यासी,
शिव ही है कैलास के वासी
शिव का दास सदा निर्भीक,
शिव के धाम बड़े रमणीक
शिव भृकुटि से भैरव जन्मे,
शिव की मूरत राखो मन में
शिव का अर्चन मंगलकारी,
मुक्ति साधन भव भयहारी
भक्त वत्सल दीन द्याला,
ज्ञान सुधा है शिव कृपाला
शिव नाम की नौका है न्यारी,
जिसने सबकी चिंता टारी
जीवन सिंधु सहज जो तरना,
शिव का हरपल नाम सुमिरना
तारकासुर को मारने वाले,
शिव है भक्तो के रखवाले
शिव की लीला के गुण गाना,
शिव को भूल के ना बिसराना
अन्धकासुर से देव बचाये,
शिव ने अद्भुत खेल दिखाये
शिव चरणो से लिपटे रहिये,
मुख से शिव शिव जय शिव कहिये
भस्मासुर को वर दे डाला,
शिव है कैसा भोला भाला
शिव तीर्थो का दर्शन कीजो,
मन चाहे वर शिव से लीजो

।। दोहा ।।
शिव शंकर के जाप से मिट जाते सब रोग ।
शिव का अनुग्रह होते ही पीड़ा ना देते शोक ।।

ब्र्हमा विष्णु शिव अनुगामी,
व है दीन हीन के स्वामी
निर्बल के बलरूप है शम्भु,
प्यासे को जलरूप है शम्भु
रावण शिव का भक्त निराला,
शिव को दी दश शीश कि माला
गर्व से जब कैलाश उठाया,
शिव ने अंगूठे से था दबाया
दुःख निवारण नाम है शिव का,
रत्न है वो बिन दाम शिव का
शिव है सबके भाग्यविधाता,
शिव का सुमिरन है फलदाता
शिव दधीचि के भगवंता,
शिव की तरी अमर अनंता
शिव का सेवादार सुदर्शन,
सांसे कर दी शिव को अर्पण
महादेव शिव औघड़दानी,
बायें अंग में सजे भवानी
शिव शक्ति का मेल निराला,
शिव का हर एक खेल निराला
शम्भर नामी भक्त को तारा,
चन्द्रसेन का शोक निवारा
पिंगला ने जब शिव को ध्याया,
देह छूटी और मोक्ष पाया
गोकर्ण की चन चूका अनारी,
भव सागर से पार उतारी
अनसुइया ने किया आराधन,
टूटे चिन्ता के सब बंधन
बेल पत्तो से पूजा करे चण्डाली,
शिव की अनुकम्पा हुई निराली
मार्कण्डेय की भक्ति है शिव,
दुर्वासा की शक्ति है शिव
राम प्रभु ने शिव आराधा,
सेतु की हर टल गई बाधा
धनुषबाण था पाया शिव से,
बल का सागर तब आया शिव से
श्री कृष्ण ने जब था ध्याया,
दश पुत्रों का वर था पाया
हम सेवक तो स्वामी शिव है,
अनहद अन्तर्यामी शिव है

।। दोहा ।।
दीन दयालु शिव मेरे, शिव के रहियो दास ।
घट घट की शिव जानते, शिव पर रख विश्वास ।।

परशुराम ने शिव गुण गाया,
कीन्हा तप और फरसा पाया
निर्गुण भी शिव शिव निराकार,
शिव है सृष्टि के आधार
शिव ही होते मूर्तिमान,
शिव ही करते जग कल्याण
शिव में व्यापक दुनिया सारी,
शिव की सिद्धि है भयहारी
शिव है बाहर शिव ही अन्दर,
शिव ही रचना सात समुन्द्र
शिव है हर इक के मन के भीतर,
शिव है हर एक कण कण के भीतर
तन में बैठा शिव ही बोले,
दिल की धड़कन में शिव डोले
हम कठपुतली शिव ही नचाता,
नयनों को पर नजर ना आता
माटी के रंगदार खिलौने,
साँवल सुन्दर और सलोने
शिव हो जोड़े शिव हो तोड़े,
शिव तो किसी को खुला ना छोड़े
आत्मा शिव परमात्मा शिव है,
दयाभाव धर्मात्मा शिव है
शिव ही दीपक शिव ही बाती,
शिव जो नहीं तो सब कुछ माटी
सब देवो में ज्येष्ठ शिव है,
सकल गुणो में श्रेष्ठ शिव है
जब ये ताण्डव करने लगता,
बृह्माण्ड सारा डरने लगता
तीसरा चक्षु जब जब खोले,
त्राहि त्राहि यह जग बोले
शिव को तुम प्रसन्न ही रखना,
आस्था लग्न बनाये रखना
विष्णु ने की शिव की पूजा,
कमल चढाऊँ मन में सुझा
एक कमल जो कम था पाया,
अपना सुंदर नयन चढ़ाया
साक्षात तब शिव थे आये,
कमल नयन विष्णु कहलाये
इन्द्रधनुष के रंगो में शिव,
संतो के सत्संगों में शिव

।। दोहा ।।
महाकाल के भक्त को मार ना सकता काल ।
द्वार खड़े यमराज को शिव है देते टाल ।।

यज्ञ सूदन महा रौद्र शिव है,
आनन्द मूरत नटवर शिव है
शिव ही है श्मशान के वासी,
शिव काटें मृत्युलोक की फांसी
व्याघ्र चरम कमर में सोहे,
शिव भक्तों के मन को मोहे
नन्दी गण पर करे सवारी,
आदिनाथ शिव गंगाधारी
काल के भी तो काल है शंकर,
विषधारी जगपाल है शंकर
महासती के पति है शंकर,
दीन सखा शुभ मति है शंकर
लाखो शशि के सम मुख वाले,
भंग धतूरे के मतवाले
काल भैरव भूतो के स्वामी,
शिव से कांपे सब फलगामी
शिव है कपाली शिव भस्मांगी,
शिव की दया हर जीव ने मांगी
मंगलकर्ता मंगलहारी,
देव शिरोमणि महासुखकारी
जल तथा विल्व करे जो अर्पण,
श्रद्धा भाव से करे समर्पण
शिव सदा उनकी करते रक्षा,
सत्यकर्म की देते शिक्षा
लिंग पर चंदन लेप जो करते,
उनके शिव भंडार हैं भरते
६४ योगनी शिव के बस में,
शिव है नहाते भक्ति रस में
वासुकि नाग कण्ठ की शोभा,
आशुतोष है शिव महादेवा
विश्वमूर्ति करुणानिधान,
महा मृत्युंजय शिव भगवान
शिव धारे रुद्राक्ष की माला,
नीलेश्वर शिव डमरू वाला
पाप का शोधक मुक्ति साधन,
शिव करते निर्दयी का मर्दन

।। दोहा ।।
शिव सुमरिन के नीर से धूल जाते है पाप ।
पवन चले शिव नाम की उड़ते दुख संताप ।।

पंचाक्षर का मंत्र शिव है,
साक्षात सर्वेश्वर शिव है
शिव को नमन करे जग सारा,
शिव का है ये सकल पसारा
क्षीर सागर को मथने वाले,
ऋद्धि सीधी सुख देने वाले
अहंकार के शिव है विनाशक,
धर्म-दीप ज्योति प्रकाशक
शिव बिछुवन के कुण्डलधारी,
शिव की माया सृष्टि सारी
महानन्दा ने किया शिव चिन्तन,
रुद्राक्ष माला किन्ही धारण
भवसिन्धु से शिव ने तारा,
शिव अनुकम्पा अपरम्पारा
त्रि-जगत के यश है शिवजी,
दिव्य तेज गौरीश है शिवजी
महाभार को सहने वाले,
वैर रहित दया करने वाले
गुण स्वरूप है शिव अनूपा,
अम्बानाथ है शिव तपरूपा
शिव चण्डीश परम सुख ज्योति,
शिव करुणा के उज्ज्वल मोती
पुण्यात्मा शिव योगेश्वर,
महादयालु शिव शरणेश्वर
शिव चरणन पे मस्तक धरिये,
श्रद्धा भाव से अर्चन करिये
मन को शिवाला रूप बना लो,
रोम रोम में शिव को रमा लो
माथे जो भक्त धूल धरेंगे,
धन और धन से कोष भरेंगे
शिव का बाक भी बनना जावे,
शिव का दास परम पद पावे
दशों दिशाओं मे शिव दृष्टि,
सब पर शिव की कृपा दृष्टि
शिव को सदा ही सम्मुख जानो,
कण-कण बीच बसे ही मानो
शिव को सौंपो जीवन नैया,
शिव है संकट टाल खिवैया
अंजलि बाँध करे जो वंदन,
भय जंजाल के टूटे बन्धन

।। दोहा ।।
जिनकी रक्षा शिव करे, मारे न उसको कोय ।
आग की नदिया से बचे, बाल ना बांका होय ।।

शिव दाता भोला भण्डारी,
शिव कैलाशी कला बिहारी
सगुण ब्रह्म कल्याण कर्ता,
विघ्न विनाशक बाधा हर्ता
शिव स्वरूपिणी सृष्टि सारी,
शिव से पृथ्वी है उजियारी
गगन दीप भी माया शिव की,
कामधेनु है छाया शिव की
गंगा में शिव , शिव मे गंगा,
शिव के तारे तुरत कुसंगा
शिव के कर में सजे त्रिशूला,
शिव के बिना ये जग निर्मूला
स्वर्णमयी शिव जटा निराळी,
शिव शम्भू की छटा निराली
जो जन शिव की महिमा गाये,
शिव से फल मनवांछित पाये
शिव पग पँकज सवर्ग समाना,
शिव पाये जो तजे अभिमाना
शिव का भक्त ना दुःख मे डोलें,
शिव का जादू सिर चढ बोले
परमानन्द अनन्त स्वरूपा,
शिव की शरण पड़े सब कूपा
शिव की जपियो हर पल माळा,
शिव की नजर मे तीनो क़ाला
अन्तर घट मे इसे बसा लो,
दिव्य जोत से जोत मिला लो
नम: शिवाय जपे जो स्वासा,
पूरीं हो हर मन की आसा

।। दोहा ।।
परमपिता परमात्मा पूरण सच्चिदानन्द ।
शिव के दर्शन से मिले सुखदायक आनन्द ।।

शिव से बेमुख कभी ना होना,
शिव सुमिरन के मोती पिरोना
जिसने भजन है शिव के सीखे,
उसको शिव हर जगह ही दिखे
प्रीत में शिव है शिव में प्रीती,
शिव सम्मुख न चले अनीति
शिव नाम की मधुर सुगन्धी,
जिसने मस्त कियो रे नन्दी
शिव निर्मल ‘निर्दोष संजय’ निराले,
शिव ही अपना विरद संभाले
परम पुरुष शिव ज्ञान पुनीता,
भक्तो ने शिव प्रेम से जीता

।। दोहा ।।
आंठो पहर अराधीय ज्योतिर्लिंग शिव रूप ।
नयनं बीच बसाइये शिव का रूप अनूप ।।

लिंग मय सारा जगत हैं, लिंग धरती आकाश
लिंग चिंतन से होत हैं सब पापो का नाश
लिंग पवन का वेग हैं, लिंग अग्नि की ज्योत
लिंग से पाताल हैँ लिंग वरुण का स्त्रोत
लिंग से हैं वनस्पति, लिंग ही हैं फल फूल
लिंग ही रत्न स्वरूप हैं, लिंग माटी निर्धूप

लिंग ही जीवन रूप हैं, लिंग मृत्युलिंगकार
लिंग मेघा घनघोर हैं, लिंग ही हैं उपचार
ज्योतिर्लिंग की साधना करते हैं तीनो लोग
लिंग ही मंत्र जाप हैं, लिंग का रूम श्लोक
लिंग से बने पुराण, लिंग वेदो का सार
रिधिया सिद्धिया लिंग हैं, लिंग करता करतार

प्रातकाल लिंग पूजिये पूर्ण हो सब काज
लिंग पे करो विश्वास तो लिंग रखेंगे लाज
सकल मनोरथ से होत हैं दुखो का अंत
ज्योतिर्लिंग के नाम से सुमिरत जो भगवंत
मानव दानव ऋषिमुनि ज्योतिर्लिंग के दास

सर्व व्यापक लिंग हैं पूरी करे हर आस
शिव रुपी इस लिंग को पूजे सब अवतार
ज्योतिर्लिंगों की दया सपने करे साकार
लिंग पे चढ़ने वैद्य का जो जन ले परसाद
उनके ह्रदय में बजे शिव करूणा का नाद

महिमा ज्योतिर्लिंग की जाएंगे जो लोग
भय से मुक्ति पाएंगे रोग रहे न शोब
शिव के चरण सरोज तू ज्योतिर्लिंग में देख
सर्व व्यापी शिव बदले भाग्य तीरे
डारीं ज्योतिर्लिंग पे गंगा जल की धार
करेंगे गंगाधर तुझे भव सिंधु से पार
चित सिद्धि हो जाए रे लिंगो का कर ध्यान
लिंग ही अमृत कलश हैं लिंग ही दया निधान

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय !

।। भाग ४ & ५ ।।

ज्योतिर्लिंग है शिव की ज्योति,
ज्योतिर्लिंग है दया का मोती
ज्योतिर्लिंग है रत्नों की खान,
ज्योतिर्लिंग में रमा जहान
ज्योतिर्लिंग का तेज़ निराला,
धन सम्पति देने वाला
ज्योतिर्लिंग में है नट नागर,
अमर गुणों का है ये सागर
ज्योतिर्लिंग की की जो सेवा,
ज्ञान पान का पाओगे मेवा
ज्योतिर्लिंग है पिता सामान,
सष्टि इसकी है संतान
ज्योतिर्लिंग है इष्ट प्यारे,
ज्योतिर्लिंग है सखा हमारे
ज्योतिर्लिंग है नारीश्वर,
ज्योतिर्लिंग है शिव विमलेश्वर
ज्योतिर्लिंग गोपेश्वर दाता,
ज्योतिर्लिंग है विधि विधाता
ज्योतिर्लिंग है शर्रेंडश्वर स्वामी,
ज्योतिर्लिंग है अन्तर्यामी
सतयुग में रत्नो से शोभित,
देव जानो के मन को मोहित
ज्योतिर्लिंग है अत्यंत सुन्दर,
छत्ता इसकी ब्रह्माण्ड अंदर
त्रेता युग में स्वर्ण सजाता,
सुख सूरज ये ध्यान ध्वजाता
सक्ल सृष्टि मन की करती,
निसदिन पूजा भजन भी करती
द्वापर युग में पारस निर्मित,
गुणी ज्ञानी सुर नर सेवी
ज्योतिर्लिंग सबके मन को भाता,
महमारक को मार भगाता
कलयुग में पार्थिव की मूरत,
ज्योतिर्लिंग नंदकेश्वर सूरत
भक्ति शक्ति का वरदाता,
जो दाता को हंस बनता
ज्योतिर्लिंग पर पुष्प चढ़ाओ,
केसर चन्दन तिलक लगाओ
जो जान करें दूध का अर्पण,
उजले हो उनके मन दर्पण

।। दोहा ।।
ज्योतिर्लिंग के जाप से तन मन निर्मल होये ।
इसके भक्तों का मनवा करे न विचलित कोई ।।

सोमनाथ सुख करने वाला,
सोम के संकट हरने वाला
दक्ष श्राप से सोम छुड़ाया,
सोम है शिव की अद्भुत माया
चंद्र देव ने किया जो वंदन,
सोम ने काटे दुःख के बंधन
ज्योतिर्लिंग है सदा सुखदायी,
दीन हीन का सहायी
भक्ति भाव से इसे जो ध्याये,
मन वाणी शीतल तर जाये
शिव की आत्मा रूप सोम है,
प्रभु परमात्मा रूप सोम है
यंहा उपासना चंद्र ने की,
शिव ने उसकी चिंता हर ली
इसके रथ की शोभा न्यारी,
शिव अमृत सागर भवभयधारी
चंद्र कुंड में जो भी नहाये,
पाप से वे जन मुक्ति पाए
छ: कुष्ठ सब रोग मिटाये,
नाया कुंदन पल में बनावे
मलिकार्जुन है नाम न्यारा,
शिव का पावन धाम प्यारा
कार्तिकेय है जब शिव से रूठे,
माता पिता के चरण है छूते
श्री शैलेश पर्वत जा पहुंचे,
कष्ट भय पार्वती के मन में
प्रभु कुमार से चली जो मिलने,
संग चलना माना शंकर ने
श्री शैलेश पर्वत के ऊपर,
गए जो दोनों उमा महेश्वर
उन्हें देखकर कार्तिकेय उठ भागे,
और कुमार पर्वत पर विराजे
जंहा श्रित हुए पारवती शंकर,
काम बनावे शिव का सुन्दर
शिव का अर्जन नाम सुहाता,
मलिका है मेरी पारवती माता
लिंग रूप हो जहाँ भी रहते,
मलिकार्जुन है उसको कहते
मनवांछित फल देने वाला,
निर्बल को बल देने वाला

7. Mann Mera Mandir मन मेरा मंदिर

सत्य है ईश्वर,
शिव है जीवन,
सुन्दर ये संसार है ।
तीनो लोक है तुझमे,
तेरी माया अपरम्पार है ।

ॐ नमः शिवाय नमो,
ॐ नमः शिवाय नमो ।

मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा,
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम,
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा ।

पार्वती जब सीता बन कर,
जय श्री राम के सम्मुख आई,
राम उनको माता कहकर,
शिव शंकर की महिमा गाई ।
शिव भक्ति में सब कुछ सूझा,
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम ।
मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा..

तेरी जटा से निकली गंगा,
और गंगा ने भीष्म दिया है,
तेरे भक्तों की शक्ति ने,
सारे जगत को जीत लिया है ।
तुझको सब देवों ने पूजा,
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम ।
मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा..

मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा,
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम,
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा ।

ॐ नमः शिवाय नमो,
ॐ नमः शिवाय नमो ।

8. Durga Amritwani दुर्गा अमृतवाणी

मंगलमयी भय मोचिनी दुर्गा सुख की खान
जिसके चरणों की सुधा स्वयं पिये भगवान

दुःखनाशक संजीवनी नवदुर्गा का पाठ
जिससे बनता भिक्षुक भी दुनिया का सम्राट

अम्बा दिव्या स्वरूपिणी का ऐसो प्रकाश
पृथ्वी जिससे ज्योतिर्मय उज्जव्वल है आकाश

दुर्गा परम सनातनी जग की सृजनहार
आदि भवानी महादेवी सृष्टि का आधार

जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ

सदमार्ग प्रदर्शनी न्यान का ये उपदेश
मन से करता जो मनन उसके कटे कलेश

जो भी विपत्ति काल में करे दुर्गा जाप
पूर्ण हो मनोकामना भागे दुःख संताप

उत्पन्न करता विश्व की शक्ति अपरम्पार
इसका अर्चन जो करे भव से उतरे पार

दुर्गा शोकविनाशिनी ममता का है रूप
सती साध्वी सतवंती सुख की कला अनूप

जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ

विष्णु ब्रह्मा रूद्र भी दुर्गा के है अधीन
बुद्धि विद्या वरदानी सर्वसिद्धि प्रवीण

लाख चौरासी योनियां से ये मुक्ति दे
महामाया जगदम्बिके जब भी दया करे

दुर्गा दुर्गति नाशिनी सिंघवाहिनी सुखकार
वेदमाता ये गायत्री सबकी पालनहार

सदा सुरक्षित वो जन है जिस पर माँ का हाथ
विकट डगरिया पे उसकी कभी ना बिगड़े बात

जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ

महागौरी वरदायिनी मैया दुःख निदान
शिवदूती ब्रह्मचारिणी करती जग कल्याण

संकटहरणी भगवती की तू माला फेर
चिंता सकल मिटाएगी घडी लगे ना देर

पारस चरणन दुर्गा के जग जग माथा टेक
सोना लोहे को करे अद्भुत कौतक देख

भवतारक परमेश्वरि लीला करे अनंत
इसके वंदन भजन से पापो का हो अंत

जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ
जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ
जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ
जय जय दुर्गे माँ, जय जय दुर्गे माँ

2. Part
दुर्गा माँ दुःख हरने वाली
मंगल मंगल करने वाली
भय के सर्प को मारने वाली
भवनिधि से जग तारने वाली

अत्याचार पाखंड की दमिनी
वेद पुराणों की ये जननी
दैत्य भी अभिमान के मारे
दीन हीन के काज संवारे

सर्वकलाओं की ये मालिक
शरणागत धनहीन की पालक
इच्छित वर प्रदान है करती
हर मुश्किल आसान है करती

भ्रामरी हो हर भ्रम मिटावे
कण-कण भीतर कजा दिखावे
करे असम्भव को ये सम्भव
धन धान्य और देती वैभव

महासिद्धि महायोगिनी माता
महिषासुर की मर्दिनी माता
पूरी करे हर मन की आशा
जग है इसका खेल तमाशा

जय दुर्गा जय-जय दमयंती
जीवन-दायिनी ये ही जयन्ती
ये ही सावित्री ये कौमारी
महाविद्या ये पर उपकारी

सिद्ध मनोरथ सबके करती
भक्त जनों के संकट हरती
विष को अमृत करती पल में
यही तारती पत्थर जल में

इसकी करुणा जब है होती
माटी का कण बनता मोती
पतझड़ में ये फूल खिलावे
अंधियारे में जोत जलावे

वेदों में वर्णित महिमा इसकी
ऐसी शोभा और है किसकी
ये नारायणी ये ही ज्वाला
जपिए इसके नाम की माला

ये ही है सुखेश्वरी माता
इसका वंदन करे विधाता
पग-पंकज की धूलि चंदन
इसका देव करे अभिनंदन

जगदम्बा जगदीश्वरी दुर्गा दयानिधान
इसकी करुणा से बने निर्धन भी धनवान

छिन्नमस्ता जब रंग दिखावे
भाग्यहीन के भाग्य जगावे
सिद्धि दात्री आदि भवानी
इसको सेवत है ब्रह्मज्ञानी

शैल-सुता माँ शक्तिशाला
इसका हर एक खेल निराला
जिस पर होवे अनुग्रह इसका
कभी अमंगल हो ना उसका

इसकी दया के पंख लगाकर
अम्बर छूते है कई जाकर
राय को ये ही पर्वत करती
गागर में है सागर भरती

इसके कब्जे जग का सब है
शक्ति के बिना शिव भी शव है
शक्ति ही है शिव की माया
शक्ति ने ब्रह्मांड रचाया

इस शक्ति का साधक बनना
निष्ठावान उपासक बनना
कुष्मांडा भी नाम इसका
कण-कण में है धाम इसका

दुर्गा माँ प्रकाश स्वरूपा
जप-तप ज्ञान तपस्या रूपा
मन में ज्योत जला लो इसकी
साची लगन लगा लो इसकी

कालरात्रि ये महामाया
श्रीधर के सिर इसकी छाया
इसकी ममता पावन झुला
इसको ध्यानु भक्त ना भुला

इसका चिंतन चिंता हरता
भक्तो के भंडार है भरता
साँसों का सुरमंडल छेड़ो
नवदुर्गा से मुंह न मोड़ो

चन्द्रघंटा कात्यानी
महादयालू महाशिवानी
इसकी भक्ति कष्ट निवारे
भवसिंधु से पार उतारे

अगम अनंत अगोचर मैया
शीतल मधुकर इसकी छैया
सृष्टि का है मूल भवानी
इसे कभी न भूलो प्राणी

दुर्गा माँ प्रकाश स्वरूपा
जप तप ज्ञान तपस्या रूपा
मन में ज्योत जला लो इसकी
साची लगन लगा लो इसकी

दुर्गा की कर साधना, मन में रख विश्वास
जो मांगोगे पाओगे क्या नहीं मेरी माँ के पास

खड्ग-धारिणी हो जब आई
काल रूप महा-काली कहाई
शुम्भ निशुम्भ को मार गिराया
देवों को भय-मुक्त बनाया

अग्निशिखा से हुई सुशोभित
सूरज की भाँती प्रकाशित
युद्ध-भूमि में कला दिखाई
दानव बोले त्राहि-त्राहि

करे जो इसका जाप निरंतर
चले ना उस पर टोना मंत्र
शुभ-अशुभ सब इसकी माया
किसी ने इसका पार ना पाया

इसकी भक्ति जाए ना निष्फल
मुश्किल को ये डाले मुश्किल
कष्टों को हर लेने वाली
अभयदान वर देने वाली

धन लक्ष्मी हो जब आती
कंगाली है मुंह छुपाती
चारों और छाए खुशाहली
नजर ना आये फिर बदहाली

कल्पतरु है महिमा इसकी
कैसे करू मै उपमा इसकी
फल दायिनी है भक्ति जिसकी
सबसे न्यारी शक्ति उसकी

अन्नपूर्णा अन्न-धनं को देती
सुख के लाखों साधन देती
प्रजा-पालक इसे ध्याते
नर-नारायण भी गुण गाते

चम्पाकली सी छवि मनोहर
इसकी दया से धर्म धरोहर
त्रिभुवन की स्वामिनी ये है
योगमाया गजदामिनी ये है

रक्तदन्ता भी इसे है कहते
चोर निशाचर दानव डरते
जब ये अमृत-रस बरसावे
मृत्युलोक का भय ना आवे

काल के बंधन तोड़े पल में
सांस की डोरी जोड़े पल में
ये शाकम्भरी माँ सुखदायी
जहां पुकारू वहां सहाई

विंध्यवासिनी नाम से,करे जो निशदिन याद
उसे ग्रह में गूंजता, हर्ष का सुरमय नाद

ये चामुण्डा चण्ड-मुण्ड घाती
निर्धन के सिर ताज सजाती
चरण-शरण में जो कोई जाए
विपदा उसके निकट ना आये

चिंतपूर्णी चिंता है हरती
अन्न-धनं के भंडारे भरती
आदि-अनादि विधि विधाना
इसकी मुट्ठी में है जमाना

रोली कुम -कुम चन्दन टीका
जिसके सम्मुख सूरज फीका
ऋतुराज भी इसका चाकर
करे आराधना पुष्प चढ़ाकर

इंद्र देवता भवन धुलावे
नारद वीणा यहाँ बजावे
तीन लोक में इसकी पूजा
माँ के सम न कोई भी दूजा

ये ही वैष्णो आदिकुमारी
भक्तन की पत राखनहारी
भैरव का वध करने वाली
खण्डा हाथ पकड़ने वाली

ये करुणा का न्यारा मोती
रूप अनेकों एक है ज्योति
माँ वज्रेश्वरी कांगड़ा वाली
खाली जाए ना कोई सवाली

ये नरसिंही ये वाराही
नेहमत देती ये मनचाही
सुख समृद्धि दान है करती
सबका ये कल्याण है करती

मयूर कही है वाहन इसका
करते ऋषि आहवान इसका
मीठी है ये सुगंध पवन में
इसकी मूरत राखो मन में

नैना देवी रंग इसी का
पतितपावन अंग इसी का
भक्तो के दुःख लेती ये है
नैनो को सुख देती ये है

नैनन में जो इसे बसाते
बिन मांगे ही सब कुछ पाते
शक्ति का ये सागर गहरा
दे बजरंगी द्वार पे पहरा

इसके रूप अनूप की, समता करे ना कोय
पूजे चरण-सरोज जो, तन मन शीतल होय

कालीका रूप में लीला करती
सभी बलाएं इससे डरती
कही पे है ये शांत स्वरूपा
अनुपम देवी अति अनूपा

अर्चना करना एकाग्र मन से
रोग हरे धनवंतरी बन के
चरणपादुका मस्तक धर लो
निष्ठा लगन से सेवा कर लो

मनन करे जो मनसा माँ का
गौरव उत्तम पाय जवाका
मन से मनसा-मनसा जपना
पूरा होगा हर इक सपना

ज्वाला-मुखी का दर्शन कीजो
भय से मुक्ति का वर लीजो
ज्योति यहाँ अखण्ड हो जलती
जो है अमावस पूनम करती

श्रद्धा -भाव को कम ना करना
दुःख में हंसना गम ना करना
घट-घट की माँ जाननहारी
हर लेती सब पीड़ा तुम्हारी

बगलामुखी के द्वारे जाना
मनवांछित ही वैभव पाना
उसी की माया हंसना रोना
उससे बेमुख कभी ना होना

शीतल-शीतल रस की धारा
कर देगी कल्याण तुम्हारा
धुनी वहां पे रमाये रखना
मन से अलख जगाये रखना

भजन करो कामाख्या जी का
धाम है जो माँ पार्वती का
सिद्ध माता सिद्धेश्वरी है
राजरानी राजेश्वरी है

धूप दीप से उसे मनाना
श्यामा गौरी रटते जाना
उकिनी देवी को जिसने आराधा
दूर हुई हर पथ की बाधा

नंदा देवी माँ जो ध्याओगे
सच्चा आनंद वही पाओगे
कौशिकी माता जी का द्वारा
देगा तुझको सदा सहारा

हरसिद्धि के ध्यान में, जाओंगे जब खो
सिद्ध मनोरथ सब तुम्हरे, पल में जायेंगे हो

महालक्ष्मी को पूजते रहियो
धन सम्पत्ति पाते ही रहिओ
घर में सच्चा सुख बरसेगा
भोजन को ना कोई तरसेगा

जिव्ह्दानी करते जो चिंतन
छुट जायेंगे यम के बंधन
महाविद्या की करना सेवा
ज्ञान ध्यान का पाओगे मेवा

अर्बुदा माँ का द्वार निराला
पल में खोले भाग्य का ताला
सुमिरन उसका फलदायक
कठिन समय में होए सहायक

त्रिपुर-मालिनी नाम है न्यारा
चमकाए तकदीर का तारा
देविकानाभ में जाकर देखो
स्वर्ग-धाम वो माँ का देखो

पाप सारे धोती पल में
काया कुंदन होती पल में
सिंह चढ़ी माँ अम्बा देखो
शारदा माँ जगदम्बा देखो

लक्ष्मी का वहां प्रिय वासा
पूरी होती सब की आशा
चंडी माँ की ज्योत जगाना
सच्चा सेवी समझ वहां जाना

दुर्गा भवानी के दर जाके
आस्था से एक चुनर चढ़ा के
जग की खुशियाँ पा जाओगे
शहंशाह बनकर आ जाओगे

वहां पे कोई फेर नहीं है
देर तो है अंधेर नहीं है
कैला देवी करौली वाली
जिसने सबकी चिंता टाली

लीला माँ की अपरम्पारा
करके ही विशवास तुम्हारा
करणी माँ की अदभुत करणी
महिमा उसकी जाए ना वरणी

भूलो ना कभी चौथ की माता
जहाँ पे कारज सिद्ध हो जाता
भूखो को जहाँ भोजन मिलता
हाल वो जाने सबके दिल का

सप्तश्रंगी मैया की, साधना कर दिन रैन
कोष भरेंगे रत्नों से, पुलकित होंगे नैन

मंगलमयी सुख धाम है दुर्गा
कष्ट निवारण नाम है दुर्गा
सुख्दरूप भव तरिणी मैया
हिंगलाज भयहारिणी मैया

रमा उमा माँ शक्तिशाला
दैत्य दलन को भई विकराला
अंत:करण में इसे बसालो
मन को मंदिर रूप बनालो

रोग शोक बाहर कर देती
आंच कभी ना आने देती
रत्न जड़ित ये भूषण धारी
देवता इसके सदा आभारी

धरती से ये अम्बर तक है
महिमा सात समंदर तक है
चींटी हाथी सबको पाले
चमत्कार है बड़े निराले

मृत संजीवनी विध्यावाली
महायोगिनी ये महाकाली
साधक की है साधना ये ही
जपयोगी आराधना ये ही

करुणा की जब नजर घुमावे
कीर्तिमान धनवान बनावे
तारा माँ जग तारने वाली
लाचारों की करे रखवाली

कही बनी ये आशापुरनी
आश्रय दाती माँ जगजननी
ये ही है विन्धेश्वारी मैया
है वो जगभुवनेश्वरी मैया

इसे ही कहते देवी स्वाहा
साधक को दे फल मनचाहा
कमलनयन सुरसुन्दरी माता
इसको करता नमन विधाता

वृषभ पर भी करे सवारी
रुद्राणी माँ महागुणकारी
सर्व संकटो को हर लेती
विजय का विजया वर है देती

योगकला जप तप की दाती
परमपदों की माँ वरदाती
गंगा में है अमृत इसका
आत्म बल है जागृत इसका

अन्तर्मन में अम्बिके, रखे जो हर ठौर
उसको जग में देवता, भावे ना कोई और

पदमावती मुक्तेश्वरी मैया
शरण में ले शरनेश्वरी मैया
आपातकाल रटे जो अम्बा
थामे हाथ ना करत विलम्बा

मंगल मूर्ति महा सुखकारी
संत जनों की है रखवारी
धूमावती के पकड़े पग जो
वश में करले सारे जग को

दुर्गा भजन महा फलदायी
प्रलय काल में होत सहाई
भक्ति कवच हो जिसने पहना
वार पड़े ना दुःख का सहना

मोक्षदायिनी माँ जो सुमिरे
जन्म मरण के भव से उबरे
रक्षक हो जो क्षीर भवानी
चले काल की ना मनमानी

जिस ग्रह माँ की ज्योति जागे
तिमर वहां से भय से भागे
दुखसागर में सुखी जो रहना
दुर्गा नाम जपो दिन रैना

अष्ट-सिद्धि नौ निधियों वाली
महादयालु भद्रकाली
सपने सब साकार करेगी
दुखियों का उद्धार करेगी

मंगला माँ का चिंतन कीजो
हरसिद्धि ते हर सुख लीजो
थामे रहो विश्वास की डोरी
पकड़ा देगी अम्बा गौरी

भक्तो के मन के अंदर
रहती है कण -कण के अंदर
सूरज चाँद करोड़ो तारे
ज्योत से ज्योति लेते सारे

वो ज्योति है प्राण स्वरूपा
तेज वही भगवान स्वरूपा
जिस ज्योति से आये ज्योति
अंत उसी में जाए ज्योति

ज्योति है निर्दोष निराली
ज्योति सर्वकलाओं वाली
ज्योति ही अन्धकार मिटाती
ज्योति साचा राह दिखाती

अम्बा माँ की ज्योति में, तू ब्रह्मांड को देख
ज्योति ही तो खींचती, हर मस्तक की रेख

3. Part
जगदम्बा जगतारिणी जगदाती जगपाल
इसके चरणन जो हुए उन पर होए दयाल

माँ की शीतल छाँव में स्वर्ग सा सुखहोये
जिसकी रक्षा माँ करे मार सके ना कोय

करुणामयी कापालिनी दुर्गा दयानिधान
जैसे जिसकी भावना वैसे दे वरदान

मातृ श्री महाशारदे नमता देत अपार
हानि बदले लाभ में जब ये हिलावे तार

जय जय आंबे माँ जय जगदम्बे माँ

नश्वर हम खिलौनों की चाबी माँ के हाथ
जैसे इशारा माँ करे नाचे हम दिन-रात

भाग्य लिखे भाग्येश्वरी लेकर कलम-दवात
कठपुतली के बस में क्या, सब कुछ माँ के हाथ

पतझड़ दे या दे हमें खुशियों का मधुमास
माँ की मर्जी है जो दे हर सुख उसके पास

माँ करुणा की नाव पर होंगे जो भी सवार
बाल भी बांका होए ना वैरी जो हो संसार

जय जय आंबे माँ, जय जगदम्बे माँ

मंगला माँ के भक्त के, ग्रह में मंगलाचार
कभी अमंगल हो नहीं, पवन चले सुखकार

शक्ति ही को लो शक्ति मिलती इसके धाम
कामधेनु के तुल्य है शिवशक्ति का नाम

चन्दन वृक्ष है एक भला बुरे है लाख बबूल
बदी के कांटे छोड़ के चुन नेकी के फूल

माँ के चरण-सरोज की कलियों जैसे सुगंध
स्वर्ग में भी ना होगा जो है यहाँ आनंद

जय जय आंबे माँ, जय जगदम्बे माँ

पाप के काले खेल में सुख ना पावे कोय
कोयले की तो खान में सब कुछ काला होय

निकट ना आने दो कभी दुष्कर्मो के नाग
मानव चोले पर नहीं लगने दीजो दाग

नवदुर्गा के नाम का मनन करो सुखकार
बिन मोल बिन दाम ही करेगी माँ उपकार

भव से पार लगाएगी माँ की एक आशीष
तभी तो माँ को पूजते श्री हरी जगदीश

जय जय आंबे माँ, जय जगदम्बे माँ
जय जय आंबे माँ, जय जगदम्बे माँ
जय जय आंबे माँ, जय जगदम्बे माँ
जय जय आंबे माँ, जय जगदम्बे माँ

4. Part
विधि पूर्वक जोत जलाकर
माँ चरणन में ध्यान लगाकर
जो जन मन से पूजा करेंगे
जीवन-सिन्धु सहज तरेंगे

कन्या रूप में जब दे दर्शन
श्रद्धा-सुमन कर दीजो अर्पण
सर्वशक्ति वो आदिकौमारी
जाइये चरणन पे बलिहारी

त्रिपुर रूपिणी ज्ञानमयी माँ
भगवती वो वरदानमयी माँ
चंड -मुंड नाशक दिव्या-स्वरूपा
त्रिशुलधारिणी शंकर रूपा

करे कामाक्षी कामना पूरी
देती सदा माँ सबरस पूरी
चंडिका देवी का करो अर्चन
साफ़ रहेगा मन का दर्पण

सर्व भूतमयी सर्वव्यापक
माँ की दया के देवता याचक
स्वर्णमयी है जिसकी आभा
चाहती नहीं है कोई दिखावा

कही वो रोहिणी कही सुभद्रा
दूर करत अज्ञान की निंद्रा
छल कपट अभिमान की दमिनी
सुख सौ भाग्य हर्ष की जननी

आश्रय दाति माँ जगदम्बे
खप्पर वाली महाबली अम्बे
मुंडन की जब पहने माला
दानव-दल पर बरसे ज्वाला

जो जन उसकी महिमा गाते
दुर्गम काज सुगम हो जाते
जय विजय अपराजिता माई
जिसकी तपस्या महाफलदाई

चेतना बुद्धि श्रधा माँ है
दया शान्ति लज्जा माँ है
साधन सिद्धि वर है माँ का
जहा भक्ति वो घर है माँ का

सप्तशती में दुर्गा दर्शन
शतचंडी है उसका चिन्तन
पूजा ये सर्वार्थ- साधक
भवसिंधु की प्यारी नावक

देवी-कुण्ड के अमृत से, तन मन निर्मल हो
पावन ममता के रस में, पाप जन्म के धो

अष्टभुजा जग मंगल करणी
योगमाया माँ धीरज धरनी
जब कोई इसकी स्तुति करता
कागा मन हंस बनता

महिष-मर्दिनी नाम है न्यारा
देवों को जिसने दिया सहारा
रक्तबीज को मारा जिसने
मधु-कैटभ को मारा जिसने

धूम्रलोचन का वध कीन्हा
अभय-दान देवन को दीन्हा
जग में कहाँ विश्राम इसको
बार-बार प्रणाम है इसको

यज्ञ हवन कर जो बुलाते
भ्रमराम्भा माँ की शरण में जाते
उनकी रखती दुर्गा लाज
बन जाते है बिगड़े काज

सुख पदार्थ उनको है मिलते
पांचो चोर ना उनको छलते
शुद्ध भाव से गुण गाते
चक्रवर्ती है वो कहलाते

दुर्गा है हर जन की माता
कर्महीन निर्धन की माता
इसके लिए कोई गैर नहीं है
इसे किसी से बैर नहीं है

रक्षक सदा भलाई की मैया
शत्रु सिर्फ बुराई की मैया
अनहद ये स्नेहा का सागर
कोई नहीं है इसके बराबर

दधिमति भी नाम है इसका
पतित-पावन धाम है इसका
तारा माँ जब कला दिखाती
भाग्य के तारे है चमकाती

कौशिकी देवी पूजते रहिये
हर संकट से जूझते रहिये
नैया पार लगाएगी माता
भय हरने को आएगी माता

अम्बिका नाम धराने वाली
सूखे वृक्ष तिलाने वाली
पारस मणियाँ जिसकी माला
दया की देवी माँ कृपाला

मोक्षदायिनी के द्वारे भक्त खड़े कर जोड़
यमदूतो के जाल को घडी में दे जो तोड़

भैरवी देवी का करो वंदन
ग्वाल बाल से खिलेगा आँगन
झोलियाँ खाली ये भर देती
शक्ति भक्ति का वर देती

विमला मैया ना विसराओ
भावना का प्रसाद चढाओ
माटी को कर देगी चंदन
साची माँ ये असुर निकंदन

तोड़ेगी जंजाल ये सारे
सुख देती तत्काल ये सारे
पग-पंकज की धुलि पा लो
माथे उसका तिलक लगा लो

हर एक बाधा टल जाएगी
भय की डायन जल जाएगी
भक्तों से ये दूर नहीं है
दाती है मजबूर नहीं है

उग्र रूप माँ उग्र तारा
जिसकी रचना ये जग सारा
अपनी शक्ति जब दिखलाती
उंगली पर संसार नचाती

जल थल नील गगन की मालिक
अग्नि और पवन की मालिक
दशों दिशाओं में ये रहती
सभी कलाओं में ये रहती

इसके रंग में ईश्वर रंगा
ये ही है आकाश की गंगा
इन्द्रधनुष है माया इसकी
नजर ना आती काया इसकी

जड़ भी ये ही चेतन ये ही
साधक ये ही साधन ये ही
ये महादेवी ये महामाया
किसी ने इसका पार ना पाया

ये है अर्पणा ये श्री सुन्दरी
चन्द्रभागा ये सावित्री
नारायणी का रूप यही है
नंदिनी माँ का स्वरूप यही है

जप लो इसके नाम की माला
कृपा करेगी ये कृपाला
ध्यान में जब तुम खो जाओगे
माँ के प्यारे हो जाओगे

इसका साधक कांटो पे फुल समझ कर सोए
दुःख भी हंस के झेलता, कभी ना विचलित होए

सुख-सरिता देवी सर्वानी
मंगल-चण्डी शिव शिवानी
आस का दीप जलाने वाली
प्रेम सुधा बरसाने वाली

मुम्बा देवी की करो पूजा
ऐसा मंदिर और ना दूजा
मनमोहिनी मूरत माँ की
दिव्या ज्योत है सूरत माँ की

ललिता ललित-कला की मालक
विकलांग और लाचार की पालक
अमृत वर्षा जहां भी करती
रत्नों से भंडार है भरती

ममता की माँ मीठी लोरी
थामे बैठी जग की डोरी
दुश्मन सब और गुनी ज्ञानी
सुनते माँ की अमृतवाणी

सर्व समर्थ सर्वज्ञ भवानी
पार्वते ही माँ कल्याणी
जय दुर्गे जय नर्मदा माता
मुरलीधर गुण तेरा गाता

ये ही उमा मिथिलेश्वरी है
भयहरिणी भक्तेश्वरी है
देवता झुकते द्वार पे इसके
कौन गिने उपकार इसके

माला धारी ये मृगवाही
सरस्वती माँ ये वाराही
अजर अमर है ये अनंता
सकल विश्व की इसको चिंता

कन्याकुमारी धाम निराला
धन पदार्थ देने वाला
देती ये संतान किसी को
जीविका के वरदान किसी को

जो श्रद्धा विश्वास से आता
कोई क्लेश ना उसे सताता
जहाँ ये वर्षा सुख की करती
वहां पे सिद्धिय पानीभरती

विधि विधाता दास है इसके
करुणा का धन पास है इससे
ये जो मानव हँसता रोता
माँ की इच्छा से ही होता

श्रद्धा दीप जलाए के जो भी करे अरदास
उसकी माँ के द्वार पे पूर्ण हो सब आस

कोई कहे इसे महाबली माता
जो भी सुमिरे वो फल पाता
निर्बल को बल यही पे मिलता
घडियों में ही भाग्य बदलता

अच्छरू माँ के गुण जो गावे
पूजा ना उसकी निष्फल जावे
अच्छरू सब कुछ अच्छा करती
चिंता संकट भय को हरती

करुणा का यहाँ अमृत बहता
मानव देख चकित है रहता
क्या क्या पावन नाम है माँ के
मुक्तिदायक धाम है माँ के

कही पे माँ जागेश्वरी है
करुणामयी करुणेश्वरी है
जो जन इसके भजन में जागे
उसके घर दर्द है भागे

नाम कही है अरासुर अम्बा
पापनाशिनी माँ जगदम्बा
की जो यहाँ अराधना मन से
झोली भरेगी भक्ति धन से

भुत पिशाच का डर ना रहेगा
सुख का झरना सदा बहेगा
हर शत्रु पर विजय मिलेगी
दुःख की काली रात टलेगी

कनकावती करेडी माई
संत जनों की सदा सहाई
सच्चे दिल से करे जो पूजन
पाये गुनाह से मुक्ति दुर्जन

हर सिद्धि का जाप जो करता
किसी बला से वो नहीं डरता
चिंतन में जब मन खो जाता
हर मनोरथ सिद्ध हो जाता

कही है माँ का नाम खनारी
शान्ति मन को देती न्यारी
इच्छापूर्ण करती पल में
शहद घुला है यहाँ के जल में

सबको यहाँ सहारा मिलता
रोगों से छुटकारा मिलता
भलाई जिसने करते रहना
ऐसी माँ का क्या है कहना

क्षीरजा माँ अम्बिके दुःख हरन सुखधाम
जन्म जन्म के बिगड़े हुए यहाँ पे सिद्ध हो काम

झंडे वाली माँ सुखदाती
कांटो को भी फुल बनाती
यहाँ भिखारी भी जो आता
दानवीर वो है बन जाता

बांझो को यहाँ बालक मिलते
इसकी दया से लंगड़े चलते
श्रद्धा भाव प्यार की भूखी
ये है दिली सत्कार की भूखी

यहाँ कभी अभिमान ना करना
कंजको का अपमान ना करना
घट-घट की ये जाननहारी
इसको सेवत दुनिया सारी

भयहरिणी भंडारिका देवी
जिसे ध्याया देवों ने भी
चरण -शरण में जो भी आये
वो कंकड़ हीरा बन जाए

बुरे ग्रह का दोष मिटाती
अच्छे दिनों की आस जगाती
ऐसा पलटे माँ ये पासा
हो जाती है दूर निराशा

उन्नति के ये शिखर चढ़ावे
रंको को ये राजा बनावे
ममता इसकी है वरदानी
भूल के भी ना भूलो प्राणी

कही पे कुंती बन के बिराजे
चारो और ही डंका बाजे
सपने में भी जो नहीं सोचा
यहा पे वो कुछ मिलते देखा

कहता कोई समुंद्री माता
कृपा समुंद्र का रस है पाता
दागी चोले यहाँ पर धुलते
बंद नसीबों के दर खुलते

दया समुंद्र की लहराए
बिगड़ी कईयों की बन जाए
लहरें समुंद्र में है जितनी
करुणा की है नेहमत उतनी

इतने ये उपकार है करती है करती
हो नहीं सकती किसी से गिनती
जिसने डोर लगन की बाँधी
जग में उत्तम पाये उपाधि

सर्व मंगल जगजननी मंगल करे अपार
सबकी मंगलकामना करता इस का द्वार

भादवा मैया है अति प्यारी
अनुग्रह करती पातकहारी
आपतियों का करे निवारण
आप कर्ता आप ही कारण

झुरगी में वो मंदिर में वो
बाहर भी वो अंदर में वो
वर्षा वो ही बसंत वो ही
लीला करे अनंत वो ही

दान भी वो ही दानी वो ही
प्यास भी वो ही पानी वो ही
दया भी वो दयालु वो ही
कृपा रूप कृपालु वो ही

इक वीरा माँ नाम उसी का
धर्म कर्म है काम उसी का
एक ज्योति के रूप करोड़ो
किसी रूप से मुंह ना मोड़ो

जाने वो किस रूप में आये
जाने कैसा खेल रचाए
उसकी लीला वो ही जाने
उसको सारी सृष्टि माने

जीवन मृत्यु हाथ में उसके
जादू है हर बात में उसके
वो जाने क्या कब है देना
उसने ही तो सब है देना

प्यार से मांगो याचक बनके
की जो विनय उपासक बनके
वो ही नैय्या वो ही खिवैया
वो रचना है वो ही रचैय्या

जिस रंग रखे उस रंग रहिये
बुरा भला ना कुछ भी कहिये
राखे मारे उसकी मर्जी
डूबे तारे उसकी मर्जी

जो भी करती अच्छा करती
काज हमेशा सच्चा करती
वो कर्मन की गति को जाने
बुरा भला वो सब पहचाने

दामन जब है उसका पकड़ा
क्या करना फिर तकदीर से झगड़ा
मालिक की हर आज्ञा मानो
उसमे सदा भलाई जानो

शांता माँ से शान्ति मांगो बन के दास
खोटा खरा क्या सोचना कर लिया जब विश्वास

रेणुका माँ पावन मंदिर
करता नमन यहाँ पर अम्बर
लाचारों की करे रखवाली
कोई सवाली जाए ना खाली

ममता चुनरी की छाँव में
स्वर्ग सी सुंदर ही गाँव में
बिगड़ी किस्मत बनती देखी
दुःख की रैना ढलती देखी

इस चौखट से लगे जो माथा
गर्व से ऊँचा वो हो जाता
रसना में रस प्रेम का भरलो
बलिदेवी का दर्शन करलो

विष को अमृत करेगी मैय्या
दुःख संताप हरेगी मैय्या
जिन्हें संभाला वो इसे माने
मूढ़ भी बनते यहाँ सयाने

दुर्गा नाम की अमृत वाणी
नस-नस बीच बसाना प्राणी
अम्बा की अनुकम्पा होगी
वन का पंछी बनेगा योगी

पतित पावन जोत जलेगी
जीवन गाडी सहज चलेगी
ठहरे ना अंधियारा घर में
वैभव होगा न्यारा घर में

भक्ति भाव की बहेगी गंगा
होगा आठ पहर सत्संगा
छल और कपट ना छलेगा
भक्तों का विश्वास फलेगा

पुष्प प्रेम के जाएंगे बांटे
जल जाएंगे लोभ के कांटे
जहाँ पे माँ का होय बसेरा
हर सुख वहां लगाएगा डेरा

चलोगे तुम निर्दोष डगर पे
दृष्टि होती माँ के घर पे
पढ़े सुने जो अमृतवाणी
उसकी रक्षक आप भवानी

अमृत में जो खो जाएगा
वो भी अमृत हो जायेगा
अमृत, अमृत में जब मिलता
अमृतमयी है जीवन बनता

दुर्गा अमृत वाणी के अमृत भीगे बोल
अंत:करण में तू प्राणी इस अमृत को घोल

जय माता दी
जय माँ दुर्गे

9. Maha Mrityunjay Mantra महामृत्युंजय मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
मंत्र का अर्थ
हम त्रिनेत्र को पूजते हैं,
जो सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं,
जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है,
वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।

10. Gayatri Mantra गायत्री मंत्र

ओमू र्भुवःभुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

11. Jagat Ke Rang Kya Dekhu जगत के रंग क्या देखूं

जगत के रंग क्या देखूं,
तेरा दीदार काफी है,
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे,
तेरा दरबार काफी है ।

नहीं चाहिए ये दुनियां के,
निराले रंग ढंग मुझको,
निराले रंग ढंग मुझको,
चली जाऊँ मैं वृंदावन,
चली जाऊँ मैं वृंदावन,
तेरा दरबार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं,
तेरा दीदार काफी है ।

जगत के साज बाजों से,
हुए हैं कान अब बहरे,
हुए हैं कान अब बहरे,
कहाँ जाके सुनू बंशी,
कहाँ जाके सुनू बंशी,
मधुर वो तान काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं,
तेरा दीदार काफी है ।

जगत के रिश्तेदारों ने,
बिछाया जाल माया का,
बिछाया जाल माया का,
तेरे भक्तों से हो प्रीति,
तेरे भक्तों से हो प्रीति,
श्याम परिवार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं,
तेरा दीदार काफी है ।

जगत की झूटी रौनक से,
हैं आँखें भर गयी मेरी,
हैं आँखें भर गयी मेरी,
चले आओ मेरे मोहन,
चले आओ मेरे मोहन,
दरश की प्यास काफी है ।

जगत के रंग क्या देखूं,
तेरा दीदार काफी है,
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे,
तेरा दरबार काफी है ।

12. Mithe Ras Se Bharyo Radha Rani Lage मीठे रस से भरीयो राधा रानी लागे

मीठे रस से भरीयो रे,
राधा रानी लागे,
राधा रानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

मीठे रस से भरीयो रे,
राधा रानी लागे,
राधा रानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

जमुना मैया कारी कारी,
राधा गोरी गोरी,
वृन्दावन में धूम मचावे,
बरसाने की छोरी ।
व्रजधाम राधा जी की,
राजधानी लागे,
राजधानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

मीठे रस से भरीयो रे,
राधा रानी लागे,
राधा रानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

कान्हा नित मुरली मे तेरी,
सुमरे बारम बार,
कोटिन रूप धरे मनमोहन,
कहुँ ना पावे पार ।
रूप रंग की छबीली,
पटरानी लागे,
पटरानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

मीठे रस से भरीयो रे,
राधा रानी लागे,
राधा रानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

ना भावे मने माखन मिसरी,
अब ना कोई मिठाई,
मारी जीबड़या ने भावे अब तो,
राधा नाम मलाई ।
वृषभानु की लली तो,
गुड़धानी लागे,
गुड़धानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

मीठे रस से भरीयो रे,
राधा रानी लागे,
राधा रानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

राधा राधा नाम रटत है,
जो नर आठों याम,
देखो उनकी बाधा दूर करत है,
राधा राधा नाम ।
राधा नाम मे सफल,
जिंदगानी लागे,
जिंदगानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

मीठे रस से भरीयो रे,
राधा रानी लागे,
राधा रानी लागे ।
मने कारो कारो,
यमुना जी रो पानी लागे ।

13. Ek Nazar Kirpa Ki Kardo Ladali Shri Radhe एक नजर किरपा की करदो लाडली श्री राधे

एक नजर कृपा की कर दो लाडली श्री राधे,
एक नजर कृपा की कर दो स्वामिनी श्री राधे,
लाडली श्री राधे, राधे
दासी की भगतो की झोली भर दो स्वामिनी श्री राधे,
एक नजर कृपा की कर दो स्वामिनी श्री राधे,
मैं तो राधा राधा सदा ही रटू ….
कभी द्वारे से लाडली के न हटू
मेरे शीश कमल पग धर दो लाडली श्री राधे …
मेरी आस ना टूट पाए कभी
इस तन से प्राण जाए तभी
दर्शन का मुझे निज दर्शन का वर दो स्वामिनी श्री राधे
एक नजर कृपा की कर दो लाडली श्री राधे
एक नजर कृपा की कर दो स्वामिनी श्री राधे,

एक नजर कृपा की कर दो लाडली श्री राधे

14. Kanha O Kanha Chhed De Muraliya कान्हा ओ कान्हा छेड़ दे मुरलिया

कान्हा ओ कान्हा
छेड़ दे मुरलिया मन हुआ जाए बेचैन
कान्हा ओ कान्हा
छेड़ दे मुरलिया मन हुआ जाए बेचैन

राह तेरी देखूं दिन रेन
राह तेरी देखूं दिन रेन
मन हुआ जाए बेचैन

हो, कान्हा ओ कान्हा
छेड़ दे मुरलिया मन हुआ जाए बेचैन

पनघट पे नील भरन जब आयी तूने ऐसी बंसी बजाई
ओ हाथों से घट छूटा यमुना में होगयी रह के खुद से परायी
लत बंसी की तूने ऐसी लगाई
सुने बिना पाऊँ नहीं चैन

कान्हा ओ कान्हा
छेड़ दे मुरलिया मन हुआ जाए बेचैन

राधा ओ राधा
छेड़ दे पायलिया तुझे देखे बिना नहीं चैन
हो, राधा ओ राधा
छेड़ दे पायलिया तुझे देखे बिना नहीं चैन

राह तेरी देखूं दिन रेन
राह तेरी देखूं दिन रेन

तुझे देखे बिना नहीं चैन
हो, राधा ओ राधा
छेड़ दे पायलिया तुझे देखे बिना नहीं चैन

तेरे आवन की चाप को सुन के
मेरी मुरलिया खुद ही बाजे
बंसी पे उँगलियाँ खुद ही नाचे
तान मधुर राधा की साजे
हर पल राधा तेरा दर्शन चाहे
कान्हा के यह व्याकुल नैन

राधा ओ राधा
छेड़ दे पायलिया हो, तुझे देखे बिना नहीं चैन

दर्शन में राधा नैनो में राधा
और नैनो की आस में राधा
हो, तान मुरलिया की छेड़ के कान्हा हर ले राधा की हर बाधा
मेरी मुरलिया तोह तुझ को पुकारे
सांझ सवेरे दिन रेन

हो, राधा ओ राधा
छेड़ दे पायलिया तुझे देखे बिना नहीं चैन

हो, कान्हा ओ कान्हा
छेड़ दे मुरलिया मन हुआ जाए बेचैन

हाँ, छेड़ दे पायलिया
हाँ, छेड़ दे मुरलिया
छेड़ दे पायलिया
छेड़ दे मुरलिया
छेड़ दे पायलिया
हाँ, छेड़ दे मुरलिया

15. Govind Bolo Hari Gopal Bolo गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो

गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो,
राधा – रमण हरी गोपाल बोलो,
गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो
गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो,
जै – जै श्याम
राधेश्याम, राधेश्याम, राधेश्याम…

ओ री ओ मोसे मोरा श्याम रूठा
कहे मोरा भाग फूटा,
कहे मैने पाप धोए,
आँसुवान बीज बोए
च्छूप-च्छूप मीयर्रा रोए,
दर्द ना जाने कोई
जै – जै श्याम
राधेश्याम, राधेश्याम, राधेश्याम…

विष का प्याला पीना पड़ा है,
मारकर भी मोहे जीना पड़ा है,
नैन मिलाए गिरधर से
गिर गई जो अपनी ही नज़र से,
रो-रो नैना खोए ।

च्छूप-च्छूप मीयर्रा रोए
दर्द ना जाने कोई,
जै – जै श्याम
राधेश्याम, राधेश्याम, राधेश्याम…

गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो,
राधा-रमण हरी गोपाल बोलो,
गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो
गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो,
जै – जै श्याम
राधेश्याम, राधेश्याम, राधेश्याम…

16. Ram Ji Ki Nikli Sawari रामजी की निकली सवारी

हो ोोोू …
सर पे मुकुट साजे मुख पे उजाला
मुख पे उजाला
हाथ धनुष गले में पुष्प माला
हम दस इनके यह सबके स्वामी
अनजान हम यह अंतर यामी
शीश झुकाओ राम गुण गाओ
बोलो जय विष्णु के अवतारी

रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी
एक तरफ लक्ष्मण एक तरफ सीता
बीच मैं जगत के पालन हारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी न्यारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी

धीरे चला रथ ो रथवाले
तोहे खबर क्या ओ भोले भाले
तोहे खबर क्या ओ भोले भाले
एक बार देखे दिल न भरेगा
सौ बार देखो फिर जी करेगा
सौ बार देखो फिर जी करेगा
व्याकुल बड़े हैं कबसे खड़े हैं
व्याकुल बड़े हैं कबसे खड़े हैं
दर्शन के प्यासे सब नर नारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी न्यारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी

चौदह बरस का वनवास पाया
माता पिता का वचन निभाया
माता पिता का वचन निभाया
धोखे से हर ली रावण ने सीता
रावण को मारा लंका को जीता
रावण को मारा लंका को जीता
तब तब यह आये तब तब यह आये
तब तब यह आये तब तब यह आये
जब जब ये दुनिया इनको पुकारि
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी
एक तरफ लक्ष्मण एक तरफ सीता
बीच में जगत के पालन हारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी
रामजी की निकली सवारी
रामजी की लीला है न्यारी.

17. Vrindavan Ka Krishan Kanhaiya वृंदावन का कृष्ण कन्हैया

वृंदावन का कृष्ण कन्हैया,
सबकी आंखों का तारा,
मन ही मन क्यों जले राधिका,
मोहन तो है प्यारा।

यमुना तट पर नंद का लाला,
जब जब रास रचाए रै,
तन मन डोले कान्हाँ,
ऐसी वंशी मधुर बजाए रै,
सुध बुध भूली खड़ी गोपियां,
जाने कैसा जादू डाला,
वृंदावन का कृष्ण कन्हैया,
सबकी आंखों का तारा।

रंग सलोना ऐसा जैसे,
छाई हो घटा सावन की,
ऐरी सखी मैं हुई दिवानी,
मनमोहन मनभावन की,
तेरे कारण देख साँवरे,
छोड़ दिया मैंने जग सारा,
वृंदावन का कृष्ण कन्हैया,
सबकी आंखों का तारा।

वृंदावन का कृष्ण कन्हैया,
सबकी आंखों का तारा,
मन ही मन क्यों जले राधिका,
मोहन तो है प्यारा।

18. Hey Ram Hey Ram हे राम हे राम

हे राम हे राम,
जग में साचो तेरो नाम,
हे राम, हे राम,
हे राम हे राम ।

तू ही माता, तू ही पिता है,
तू ही माता, तू ही पिता है,
तू ही तो है, राधा का श्याम,
हे राम हे राम ।

तू अंतर्यामी, सबका स्वामी,
तू अंतर्यामी, सबका स्वामी,
तेरे चरणों में, चारो धाम,
हे राम हे राम ।

तू ही बिगड़े, तू ही सवारे,
तू ही बिगड़े, तू ही सवारे,
इस जग के, सारे काम,
हे राम हे राम ।

तू ही जगदाता, विश्वविधता,
तू ही जगदाता, विश्वविधता,
तू ही सुबह, तू ही शाम,
हे राम हे राम ।

हे राम हे राम,
जग में साचो तेरो नाम,
हे राम, हे राम,
हे राम हे राम ।

19. Prabhu Ji Tum Chandan Hum Paani प्रभु जी तुम चंदन हम पानी

प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
जाकी अंग बास समायी,
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,

प्रभु जी, तुम घन, बन हम मोरा,
प्रभु जी, तुम घन, बन हम मोरा,
जैसे चितवत चांद चकोरा,
प्रभु जी, तुम घन, बन हम मोरा,

प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती,
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती,
जाकी ज्योत बरे दिन राती,
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती,

प्रभु जी तुम मोती हम धागा,
प्रभु जी तुम मोती हम धागा,
जैसे सोने मिलत सुहागा,
प्रभु जी तुम मोती हम धागा,
प्रभु जी, तुम स्वामी, हम दासा,
प्रभु जी, तुम स्वामी, हम दासा,
एसी भक्ति करै रैदासा,
प्रभु जी, तुम स्वामी, हम दासा,
प्रभु जी, तुम स्वामी, हम दासा

20. Om Jai Jagdish Hare ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे -दुःख बिनसे मन का
स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे
सुख सम्पति घर आवे
कष्ट मिटे तन का
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा
आस करूं मैं जिसकी
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सब के स्वामी
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी
मैं सेवक तुम स्वामी
कृपा करो भर्ता
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति
स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय
किस विधि मिलूं दयामय
तुमको मैं कुमति
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता ठाकुर तुम मेरे
स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ
अपने शरण लगाओ
द्वार पड़ा तेरे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा
स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
सन्तन की सेवा
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तन मन धन सब कुछ है तेरा
स्वामी सब कुछ है तेरा
तेरा तुझको अर्पण
तेरा तुझको अर्पण
क्या लागे मेरा
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

21. Yashomati Maiya Se Bole Nandlala यशोमती मैया से बोले नंदलाला

यशोमती मैया से बोले नदलाला
यशोमती मैया से बोले नदलाला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला
राधा क्यों गोरी
सौघ्स

ोाओ..
यशोमती मैया से बोले नदलाला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला
बोली मुस्काती मैया लालन को बताया
बोली मुस्काती मैया लालन को बताया
कारी अधियारी आधी रात में तू आया
लाडला कन्हैया मेरा होआ
लाडला कन्हैया मेरा काली कमली वाला
इसीलिए काला
यशोमती मैया से बोले नदलाला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला

बोली मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारे
बोली मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारे
गोरी-गोरी राधिका के नैन कजरारे
काले नैनो वाली ने होआ
काले नैनो वाली ने ऐसा जादू डाला
इसीलिए काला
यशोमती मैया से बोले नदलाला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला

इतने में राधा प्यारी आई इठलाती
मई ने न जादू डाला बोली बलखाती
मैया कन्हैया तेरा जग से निराला
इसीलिए काला
यशोमती मैया से बोले नदलाला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला
राधा क्यों गोरी मै क्यों काला.

22. Shankar Mere Kab Honge Darshan Tere ओ शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे

जीवन पथ पर शाम सवेरे
छाए है घनघोर अँधेरे

ओ शंकर मेरे कब
होंगे दर्शन तेरे
ओ शंकर मेरे कब
होंगे दर्शन तेरे

जीवन पथ पर शाम सवेरे
छाए है घनघोर अँधेरे
ओ शंकर मेरे कब
होंगे दर्शन तेरे

मैं मूरख तू अंतर्यामी
मैं मूरख तू अंतर्यामी
मैं सेवक तू मेरा स्वामी
कहे मुझसे नाता तोड़ा
मैं छोड़ा
मंदिर भी छोड़ा
कितनी दूर कितनी
दूर लगाये तूने लाके
लाश पे दायरे
ओ शंकर मेरे कब
होंगे दर्शन तेरे

तेरे द्वार से ज्योत जगाते
तेरे द्वार से ज्योत जगाते
युग भी तेरे गुण गाते
न मांगू में हीरे मोती
में मंगू बस थोड़ी सी ज्योति
खाली हाथ न जाऊँगा में
खाली हाथ न जाऊँगा में
डाटा द्वार से तेरे
ओ शंकर मेरे कब
होंगे दर्शन तेरे

कब होंगे दर्शन तेरे
कब होंगे दर्शन तेरे
कब होंगे दर्शन तेरे.

23. Duniya Mein Tera Bada Naam दुनिया में तेरा है बड़ा नाम

दुनिया में तेरा है बड़ा नाम
आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम
मेरी बिनती सुने तो जानूं
मेरी बिनती सुने तो जानूं
मानूं तुझे मैं राम
राम नहीं तो कर दूंगा
सारे जग में तुझे बदनाम
दुनिया में तेरा है बड़ा नाम
आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम
मैं नहीं कहता , कहते हैं सारे
मैं नहीं कहता , कहते हैं सारे
तूने बनाये चाँद सितारे
तू दुःख दूर करे तो मेरे
मेरी बिगड़ी बनाये तो तेरे
गन गाऊं सुबह -ओ -शाम
राम नहीं तो कर दूंगा
सारे जग में तुझे बदनाम
दुनिया में तेरा है बड़ा नाम
आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम

साथी जगत में बस इक अपना
साथी जगत में बस इक अपना
इस जीवन का आखिरी सपना
वह भी तोड़ के दाता न ले
यूँ मुंह मोड़ के दाता न ले
सर पे तू यह इल्जाम
राम नहीं तो कर दूंगा
सारे जग में तुझे बदनाम
दुनिया में तेरा है बड़ा नाम
आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम

मजबूरी तेरे दर पे ले आयी
मजबूरी तेरे दर पे ले आयी
आशा की मैंने ज्योत जगाई
ओह मन की बुझती ज्योत जग दे
मेरी टूटी आस बांध दे
आया मैं तेरे धाम
राम नहीं तो कर दूंगा
सारे जग में तुझे बदनाम

आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम
आज मुझे भी तुझसे पड़ गया काम
मेरी बिनती सुने तो जानूं
मेरी बिनती सुने तो जानूं
हो राम , हो राम
मेरी बिनती सुने तो जानूं
मेरी बिनती सुने तो जानूं
हो राम , हो राम

24. Ram Chandra Keh Gaye Siya Se रामचंद्र कह गए सिया से

हे जी रे
हे रामचंद्र कह गए सिया से
रामचंद्र कह गए सिया से
ऐसा कलयुग आएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा
हे जी रे
सिया ने पूछा ‘भगवन!
कलयुग में धर्म – कर्म को
कोई नहीं मानेगा?’
तो प्रभु बोले
‘धर्म भी होगा कर्म भी होगा,
परंतु शर्म नहीं होगी
बात बात में मात-पिता को
बेटा आँख दिखाएगा’

हे रामचंद्र कह गए सिया से
राजा और प्रजा दोनों में
होगी निसिदिन खेचातानी,
कदम कदम पर करेंगे दोनों
अपनी अपनी मनमानी,

हे जिसके हाथ में होगी लाठी
जिसके हाथ में होगी लाठी
भैंस वही ले जाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा
हे रामचंद्र कह गए सिया से
सुनो सिया कलयुग में
काला धन और काले मन होंगे
काले मन होंगे
चोर उच्चक्के नगर सेठ,
और प्रभु भक्त निर्धन होंगे
निर्धन होंगे
हे जो होगा लोभी और भोगी
जो होगा लोभी और भोगी
वो जोगी कहलाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खरग
हे रामचंद्र कह गए सिया से
मंदिर सूना सूना होगा
भरी रहेंगी मधुशाला,
मधुशाला
पिता के संग संग भरी सभा में
नाचेंगी घर की बाला, घर
की बाला
हे केसा कन्यादान पिता ही
केसा कन्यादान पिता ही
कन्या का धन खाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा हे जी रे
हे मूरख की प्रीत बुरी
जुए की जीत बुरी
बुरे संग बैठ ते भागे ही
भागे, भागे ही भागे
हे काजल की कोठरी में
कैसे ही जतन करो
काजल का दाग भाई लागे ही
लागे रे भाई
काजल का दाग भाई लागे ही लागे
हे जी रे
हे कितना जती को कोई
कितना सती हो कोई
कामनी के संग काम जागे
ही जागे, जागे ही जागे
ऐ सुनो कहे गोपीराम
जिसका है नाम काम
उसका तो फंद गले लागे ही
लागे रे भाई

उसका तो फंद गले लागे ही लागे
हे जी रे

25. Rom Rom Mein Basne Wale Ram रोम रोम मे बसने वाले राम

हे रोम रोम मे बसने वाले राम,
जगत के स्वामी,
हे अन्तर्यामी,
मे तुझ से क्या मांगूं
आप का बंधन तोड़ चुकी हूं,
तुझ पर सब कुछ छोड़ चुकी हूं |
नाथ मेरे मै क्यूं कुछ सोचूं तू जाने तेरा काम

हे रोम रोम मे बसने वाले राम,
जगत के स्वामी,
हे अन्तर्यामी,
मे तुझ से क्या मांगूं
तेरे चरण की धुल जो पायें,
वो कंकर हीरा हो जाएँ |
भाग मेरे जो मैंने पाया,
इन चरणों मे ध्यान
हे रोम रोम मे बसने वाले राम,

जगत के स्वामी,
हे अन्तर्यामी,
मे तुझ से क्या मांगूं
भेद तेरा कोई क्या पहचाने,
जो तुझ सा को वो तुझे जाने
तेरे किये को हम क्या देवे,
भले बुरे का नाम हे रोम रोम मे बसने वाले राम,

जगत के स्वामी,
हे अन्तर्यामी,
मे तुझ से क्या मांगूं

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